Breaking News

गंगा के बढ़ते जलस्तर पर एक्शन मोड में बिहार सरकार, CM सम्राट चौधरी ने दिया निर्देश     |   अमेरिकी दूत विटकॉफ और कुशनर मॉस्को पहुंचे, रूस-यूक्रेन के बीच शांति की पहल करेंगे     |   झीरम घाटी माओवादी हमला: छत्तीसगढ़ की NIA कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया     |   दिल्ली की मुख्यमंत्री ने जलभराव वाले इलाकों का निरीक्षण किया     |   रूस: अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि विटकॉफ और कुशनर के साथ बातचीत करेंगे पुतिन     |  

भारत को लेकर बांग्लादेश का मौजूदा रुख कुछ हद तक नकारात्मक है: कर्ण सिंह

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने मंगलवार को कहा कि यह दुखद है कि बांग्लादेश की मुक्ति में भारत की भूमिका के बावजूद वहां की अंतरिम और मौजूदा सरकार का भारत के प्रति रुख ‘‘कुछ हद तक नकारात्मक’’ नजर आता है।

सिंह ने कहा कि उनका मानना है कि बांग्लादेश की सरकार और वहां के लोगों को अपने देश के निर्माण में भारत की भूमिका को याद करना चाहिए।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने एक बयान में कहा, ‘‘बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के समय इंदिरा गांधी के मंत्रिमंडल का एकमात्र जीवित सदस्य होने के नाते मैं उस देश के बारे में कुछ बातें कहना जरूरी समझता हूं। सबसे पहले मैं यह कहना चाहूंगा कि अगर शेख मुजीबुर रहमान नहीं होते तो बांग्लादेश भी नहीं होता।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हाल में बांग्लादेश के एक गणमान्य व्यक्ति ने मुझसे मुलाकात की तो मैंने उनसे साफ कहा कि एक समाचार प्रसारण में कुछ लोगों को शेख मुजीबुर रहमान की प्रतिमा हथौड़े से तोड़ते देखकर मैं स्तब्ध रह गया था। मैंने उनसे कहा कि यह ऐसा ही है जैसे भारत में कोई महात्मा गांधी की प्रतिमा तोड़ दे।’’

सिंह ने कहा कि पूर्वी पाकिस्तान में जनरल टिक्का खान के अत्याचारों के बाद लाखों शरणार्थी भारत आने लगे थे।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल ने कहा, ‘‘उनकी संख्या बढ़कर कई लाख हो गई थी और हम सभी यह सोच रहे थे कि इंदिरा जी हस्तक्षेप करने का फैसला कब करेंगी। (तत्कालीन) थल सेनाध्यक्ष जनरल (सैम) मानेकशॉ की सलाह पर उन्होंने मानसून के बाद नदियों का जलस्तर कम होने तक इंतजार किया।’’

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी ने युद्ध को शानदार तरीके से लड़ा और 15 दिन में पूरी जीत हासिल कर ली तथा पाकिस्तान की सेना के जनरल (ए ए के) नियाजी ने 16 दिसंबर 1971 को 93,000 सैनिकों के साथ जनरल (जगजीत सिंह) अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और सैकड़ों वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भारत के नियंत्रण में आ गया।

सिंह ने कहा, ‘‘आज की पीढ़ी के लिए यह समझना मुश्किल है कि बांग्लादेश के अस्तित्व में आने पर हमें कितनी खुशी हुई थी। मैं उस समय लोकसभा में था, जब आम तौर पर अपनी भावनाएं प्रकट नहीं करने वाली इंदिरा गांधी लगभग दौड़ते हुए सदन में आईं और कहा, ‘अध्यक्ष महोदय, मुझे एक घोषणा करनी है।’ सदन में पूरी तरह सन्नाटा छा गया और उन्होंने कहा, ‘भारतीय सेना और मुक्ति वाहिनी विजयी हुई हैं। ढाका अब एक स्वतंत्र देश की स्वतंत्र राजधानी है’ या उन्होंने इसी आशय के शब्द कहे। पूरा सदन और देश खुशी से झूम उठा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह दुखद है कि बांग्लादेश की मुक्ति में हमारी भूमिका के बावजूद वहां की अंतरिम और मौजूदा सरकार, दोनों का भारत के प्रति रुख कुछ हद तक नकारात्मक नजर आता है।’’

सिंह ने कहा कि जहां तक शेख हसीना का सवाल है, उनसे चाहे जो गलतियां हुई हों, वह शेख मुजीब की बेटी हैं और 15 वर्ष तक प्रधानमंत्री रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि वह बाल-बाल बच गईं। भारत द्वारा उन्हें प्रत्यर्पित करने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि ऐसा करना आतिथ्य और संरक्षण की हमारी सभी परंपराओं के खिलाफ होगा।’’

सिंह ने कहा कि अगर अपने जीवन को गंभीर खतरा होने के बावजूद वह लौटने का फैसला स्वयं करती हैं तो यह उनका अपना निर्णय होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘अंत में मैं यही कहूंगा कि राजनीति में कृतज्ञता जैसी कोई चीज नहीं होती, फिर भी मेरा मानना है कि बांग्लादेश की सरकार और वहां के लोगों को अपने देश के निर्माण में भारत की भूमिका को याद करना चाहिए।’’

भाषा

सिम्मी सुभाष

सुभाष