नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) भारत की एशियाई खेलों की टेनिस टीम से बाहर किए गए पांच खिलाड़ियों के नाम अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) द्वारा भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को भेजी गई संक्षिप्त सूची में शामिल नहीं थे। भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के एक सूत्र ने मंगलवार को यह दावा किया लेकिन टेनिस संस्था ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि उसने इन खिलाड़ियों के चयन के लिए पूरा प्रयास किया था।
मानस धामने (पुरुष एकल), वैष्णवी अडकर (महिला एकल), सहजा यमलापल्ली (महिला एकल), वैदेही चौधरी (महिला युगल) और प्रार्थना थोम्बारे (महिला युगल) सात सदस्यीय भारतीय टेनिस टीम में जगह नहीं बना सके क्योंकि वे महाद्वीपीय रैंकिंग में शीर्ष आठ में होने के मानदंड को पूरा नहीं करते थे।
सूत्र ने पीटीआई से कहा, ‘‘खेल मंत्रालय को आईओए द्वारा साझा की गई अंतिम सूची में उनके नाम नहीं मिले थे। असल में एआईटीए द्वारा आईओए को भेजी गई संक्षिप्त सूची में भी उनके नाम नहीं थे।’’
सूत्र के अनुसार इन खिलाड़ियों को बाहर किया जाना उचित है क्योंकि उनके हालिया प्रदर्शन से भी पदक जीतने की संभावना या प्रतियोगिता में प्रभावी भागीदारी की क्षमता नहीं झलकती।
हालांकि एआईटीए ने कहा कि उसने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रघुराम अय्यर के समक्ष इन खिलाड़ियों को अंतिम टीम से बाहर किए जाने के फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया था।
एआईटीए के महासचिव सुंदर अय्यर ने एक बयान में कहा, ‘‘एआईटीए ने स्पष्ट किया था कि मामला केवल व्यक्तिगत खिलाड़ियों का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि भारत अपनी सर्वश्रेष्ठ संभावित टेनिस टीम उतारे।’’
बयान में कहा गया, ‘‘यह कहना कि एआईटीए ने खिलाड़ियों के नाम नहीं दिए या अपने चुने हुए खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने का अनुरोध नहीं किया, तथ्यात्मक रूप से गलत है और तीन जुलाई 2026 को आईओए को भेजे गए संघ के लिखित अनुरोध के विपरीत है।’’
एआईटीए के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए साइ के सूत्र ने कहा कि जब अस्थायी सूची भेजी गई थी तब आईओए ने संघ को स्पष्ट रूप से बता दिया था कि ये पांचों नाम चयन मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें पता था कि चयन मानदंड के अनुसार ये नाम पात्र नहीं हैं और उन्हें बता दिया गया था कि वे संक्षिप्त सूची में शामिल नहीं हो सकते। आखिरकार ऐसा ही हुआ।’’
खेल मंत्रालय के चयन मानदंड के अनुसार एकल स्पर्धाओं में खिलाड़ियों का एशिया में शीर्ष छह में और युगल में शीर्ष आठ में होना जरूरी था। इसके लिए 12 महीने की अवधि में प्रदर्शन का आकलन किया गया। खेल मंत्रालय ने यह मानदंड पिछले साल सितंबर में जारी किया था।
इन खिलाड़ियों को टीम से बाहर किए जाने की दो बार के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता रोहन बोपन्ना ने कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि ‘एक ऐसी समिति ने कागज पर उनका भाग्य तय कर दिया जो कभी उस स्थिति में खड़ी नहीं रही जहां वे खड़े हैं और खेलने से पहले ही उनका फैसला कर दिया गया।’
सहजा (विश्व रैंकिंग 344) फिलहाल महिला एकल में भारत की नंबर एक खिलाड़ी हैं जबकि वैष्णवी (विश्व रैंकिंग 388) राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे स्थान पर हैं। प्रार्थना 2014 एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता हैं जबकि वैदेही दो बार की राष्ट्रीय चैंपियन हैं और 18 वर्षीय मानस चैलेंजर स्तर के टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंच चुके हैं।
खेल मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया था कि कुछ वर्गों की ओर से दबाव बनाए जाने के बावजूद चयन मानदंड में ढील नहीं दी जाएगी।
सूत्र ने कहा, ‘‘एशिया में 25वें से 40वें स्थान पर रहने वाले टेनिस खिलाड़ियों के लिए विवेकाधीन तरीके से पिछले दरवाजे से मंजूरी देना प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को खत्म कर देगा और अन्य राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) की ओर से बड़े पैमाने पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता खोल देगा।’’
प्रार्थना को युगल स्पर्धा में वैदेही के साथ जोड़ी बनानी थी लेकिन दोनों ने अब तक साथ में कोई टेनिस नहीं खेला है।
सूत्र ने कहा, ’’इससे एशियाई खेलों से पहले उनकी तैयारी और प्रतिस्पर्धी जोड़ी बनाने के इरादे को लेकर उचित सवाल उठते हैं।’’
बोपन्ना ने कहा था कि इन खिलाड़ियों को खेलने का अवसर नहीं देना खेल राष्ट्र बनाने के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा था, ‘‘आप बोर्डरूम में यह तय करके खेल राष्ट्र या खेल अर्थव्यवस्था नहीं बन सकते कि कौन प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकता है।’’
हालांकि साइ के सूत्र ने इसका जवाब देते हुए कहा, ‘‘खेल अनुभव हासिल करने के लिए आईटीएफ और चैलेंजर सर्किट होते हैं, एशियाई खेल नहीं।’’
एशियाई खेलों के लिए अंतिम टेनिस टीम में एकल में केवल सुमित नागल को जगह मिली है, जबकि रामकुमार रामनाथन, साकेत माइनेनी, युकी भांबरी, ऋतुजा भोसले और अंकिता रैना युगल टीम का हिस्सा हैं।
भाषा सुधीर आनन्द
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