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चीनी के मिल भाव 18 प्रतिशत घटकर 55 रुपये प्रति किलो पर आए: खाद्य सचिव

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) चीनी के आयात की अनुमति दिए जाने और जमाखोरी एवं सट्टेबाजी पर सरकार के अंकुश लगाने के बाद इसके मिल भाव 18 प्रतिशत घटकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम रह गए हैं। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

हालांकि, मिल भाव में आई गिरावट का असर थोक और खुदरा बाजारों में दिखना अभी बाकी है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, 24 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक भाव 58.29 रुपये और खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।

मिलों के स्तर पर चीनी के भाव पिछले सप्ताह रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए थे। चोपड़ा ने कहा कि मिलों द्वारा भाव बढ़ाए जाने के कारण यह तेजी आई थी।

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘मिलों द्वारा बढ़ाए गए चीनी के मिल भाव अब कम होने लगे हैं। ये घटकर 55 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए हैं और आने वाले दिनों में इनमें और गिरावट आएगी।’’

चोपड़ा ने कहा कि कीमतों में यह उछाल बुनियादी कारणों का नतीजा नहीं था, क्योंकि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार है। विपणन वर्ष 2025-26 में चीनी का उत्पादन 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जो 343 लाख टन के पिछले अनुमान से कम है। वहीं, सालाना घरेलू मांग करीब 280-285 लाख टन है।

अचानक चीनी के दाम बढ़ने के बाद सरकार ने पिछले सप्ताह 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देने के साथ थोक उपभोक्ताओं के लिए भंडार सीमा भी लागू कर दी। राज्यों को जमाखोरी और सट्टेबाजी की जांच के लिए निरीक्षण तेज करने का निर्देश भी दिया गया था।

राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ (एनएफसीएसएफ) के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवरे ने कहा कि फिलहाल देश के किसी भी राज्य में मिल स्तर के भाव 55 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं है।

उन्होंने कहा कि देशभर में जमाखोरी की जांच के लिए उड़न दस्ते तैनात किए गए हैं और केंद्र के हस्तक्षेप से कीमतों में बढ़ोतरी पर अंकुश लगा है। उन्होंने कहा कि चीनी के मिल भाव में आगे भी गिरावट की उम्मीद है।

नाईकनवरे के मुताबिक, आमतौर पर चीन के मिल और थोक भाव में दो-तीन रुपये तथा मिल और खुदरा भाव में सात-आठ रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर होता है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय