पटना, 24 अगस्त (भाषा) बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के एक अधिकारी द्वारा नौकरी के अभ्यर्थियों के जारी आंदोलन पर टिप्पणी करते समय एक कहावत का इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि अधिकारी ने उनकी तुलना ‘कुत्तों’ से की।
बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें वह आयोग की प्रेस वार्ता के दौरान प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांगों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
सिंह से शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई) को प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के दो चरण में कराने तथा हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों के साथ कथित भेदभाव के आरोपों पर सवाल पूछा गया था।
उन्होंने जवाब में कहा, ‘‘जिन्हें आपत्ति है, वे अदालत क्यों नहीं जाते? आयोग की ओर से मैं केवल इतना कहना चाहता हूं— हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार।’’
वीडियो में सिंह पत्रकारों से यह आग्रह करते भी सुनाई देते हैं कि उनकी इस कहावत को नजरअंदाज किया जाए। इसके बावजूद यह वीडियो समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिसके बाद छात्रों और विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सिंह से सार्वजनिक माफी की मांग की और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार से उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
तेजस्वी यादव जब गर्दनीबाग स्थित धरनास्थल पहुंचे तो कई अभ्यर्थियों ने नारे लगाते हुए कहा, ‘‘बीपीएससी अधिकारी की टिप्पणी से साफ है कि प्रशासन की नजर में हमारी हैसियत आवारा कुत्तों से ज्यादा नहीं है।’’
राजद नेता रोहिणी आचार्य ने भी अपने ‘एक्स’ हैंडल पर वीडियो साझा करते हुए टिप्पणी को ‘‘अपमानजनक’’ और ‘‘गरिमा के प्रतिकूल’’ बताया।
विवाद बढ़ने के बाद राजेश कुमार सिंह ने एक संक्षिप्त वीडियो जारी कर कहा, ‘‘मैंने केवल एक कहावत कही थी, लेकिन मेरे शब्दों को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया। फिर भी यदि मेरी बात से किसी की भावनाएं, अनजाने में भी, आहत हुई हैं तो मैं खेद व्यक्त करता हूं।’’
इस बीच, कई मीडिया संस्थानों ने खबर दी कि राज्य सरकार ने सिंह को पद से हटाने और निलंबित करने का निर्णय लिया है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
भाषा कैलाश आशीष
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