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शिमला, 24 अगस्त (भाषा) हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को मानसून सत्र के तीसरे दिन सदन की कार्यवाही तीखी बहस, नारेबाजी और भाजपा विधायकों के बहिर्गमन के बीच चली। वहीं, राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के बाद खत्म हो गया।
भाजपा विधायक सदन में राष्ट्रगीत गाने की मांग पर अड़े हुए थे, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई थी।
गतिरोध खत्म होने के बाद सदन में प्रश्नकाल, शून्यकाल और अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन इस दौरान तीखी बहस भी हुई।
राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान को लेकर गतिरोध विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के फैसले के बाद खत्म हुआ।
राष्ट्रगीत के मुद्दे पर अध्यक्ष ने फैसला दिया कि सदन की कार्यवाही राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाने के साथ शुरू होगी और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के साथ समाप्त होगी।
उन्होंने कहा कि सत्र के अंतिम दिन ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाया जाएगा।
पठानिया ने कहा कि संसद द्वारा राष्ट्रगीत के संबंध में बनाए गए कानून में यह जरूरी नहीं किया गया है कि विधानसभा सत्र की शुरुआत में ही राष्ट्रगीत गाया जाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा की अपनी परंपराएं और नियम हैं।
कांग्रेस के इस आरोप पर कि शुक्रवार को सत्र के पहले दिन भाजपा विधायकों ने राष्ट्रगान का अपमान किया, अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रगान के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी सदस्य खड़े हुए थे, लेकिन राष्ट्रगान समाप्त होने के तुरंत बाद भाजपा विधायक विपिन परमार ने हाथ उठाया था।
विपक्ष की वीडियो फुटेज उपलब्ध कराने की मांग पर पठानिया ने कहा कि उन्हें भाजपा विधायकों का अनुरोध मिला है और इसपर गौर किया जा रहा है।
इससे पहले विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस नेताओं ने भाजपा विधायकों राष्ट्रगान का अपमान करने का झूठा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह गंभीर अपराध है और भाजपा विधायक दल इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।
ठाकुर ने अध्यक्ष से इस मामले पर फैसला देने का आग्रह किया था।
भाजपा ने आरोप को गंभीर बताते हुए शुक्रवार को राष्ट्रगान गाए जाने के समय सदन के अंदर की वीडियो फुटेज की मांग की थी। उसने विधानसभा सचिव को लिखित अनुरोध देकर फुटेज मांगी थी।
हालांकि, अध्यक्ष के फैसले के बावजूद भाजपा विधायकों ने वीडियो फुटेज उपलब्ध कराने की मांग करते हुए नारेबाजी की।
भाषा जोहेब सुरेश
सुरेश