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घटना के बाद अनुपस्थित रहने के कारण पुलिस शिकायत दर्ज करने में देरी हुई: कुलपति

कोलकाता, 24 अगस्त (भाषा) यादवपुर विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य ने सोमवार को कहा कि 20 अगस्त की तड़के परिसर में तोड़फोड़, झड़प और आगजनी की घटना को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में इसलिए देरी हुई क्योंकि वह अशांति के तुरंत बाद परिसर नहीं पहुंच सके।

भट्टाचार्य ने संवाददाताओं से कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 21 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद कई प्राथमिकी दर्ज की गईं। उन्होंने कहा कि प्रशासन जांच के लिए सभी साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपेगा।

विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार तड़के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी स्टूडेंट्स यूनियन (एफईटीएसयू) की आम बैठक के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध एबीवीपी और वामपंथी विचारधारा वाले छात्र संगठनों के सदस्यों के बीच झड़प हो गई थी, जिसमें कई छात्र घायल हुए थे। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर परिसर में बाहरी लोगों को लाने का आरोप लगाया था।

कुलपति ने कहा, ‘‘जब घुसपैठिए परिसर में आए और तोड़फोड़ शुरू हुई, तब मैं परिसर नहीं आ सका। यही प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी का कारण है। हमने शुक्रवार को अनधिकृत प्रवेश, तोड़फोड़, हमले और यादवपुर विश्वविद्यालय के अरविंद भवन के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाने के संबंध में कई प्राथमिकी दर्ज कराई हैं।’’

इससे जुड़े एक घटनाक्रम में 20 अगस्त की दोपहर एसएफआई और एबीवीपी समर्थकों ने एक ही सड़क के दो सिरों से परिसर में प्रवेश करने की कोशिश। पुलिसकर्मी उन्हें रोकने के लिए संघर्ष करते नजर आए। इस दौरान विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न गेट नंबर चार से उतार दिया गया।

पुलिस को सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य सौंपने में हुई देरी के बारे में पूछे जाने पर कुलपति ने कहा, ‘‘हम घटनाक्रम की पूरी कड़ी से जुड़े सभी साक्ष्य सौंपेंगे। इनमें वह सीसीटीवी फुटेज भी शामिल है, जिसमें 19 अगस्त की आधी रात बाहरी लोगों के परिसर में प्रवेश करने और 20 अगस्त को प्रतीक चिह्न तोड़े जाने की घटनाएं रिकार्ड है।’’

इस बीच, वामपंथी छात्र संगठनों और एबीवीपी ने सोमवार को यादवपुर विश्वविद्यालय की घटना को लेकर शहर में अलग-अलग मार्च निकाले।

एसएफआई, डीवाईएफआई, एआईएसएफ और डीएसओ समर्थकों ने सियालदह रेलवे स्टेशन से कॉलेज स्ट्रीट तक मार्च निकाला, जिससे दोपहर में यातायात प्रभावित हुआ।

वे ‘‘तोड़फोड़ और लोकतांत्रिक ताकतों पर हमले’’ में कथित रूप से शामिल लोगों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे।

वहीं, एबीवीपी सदस्यों ने ढाकुरिया से यादवपुर विश्वविद्यालय के पास 8बी बस स्टैंड तक रैली निकाली और विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को बाधित करने की ‘‘वामपंथी साजिश’’ के खिलाफ प्रदर्शन किया।

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से संस्थान की विरासत और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की भी मांग की।

इस बीच, जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेयूटीए) ने परिसर में तोड़फोड़ और प्रतीक चिह्न को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर निराशा जताई।

जेयूटीए ने एक बयान में सभी हितधारकों से संस्थान में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक माहौल सुनिश्चित करने की अपील की।

भाषा

अमित माधव

माधव