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ममता ने फुटपाथ पर रहने वाले परिवार को मदद की पेशकश की, शुभेंदु ने किया सवाल

(फोटो के साथ)

कोलकाता, 24 अगस्त (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने सोमवार को फुटपाथ पर रहने वाले एक परिवार की मदद की पेशकश की, जिसे पश्चिम बंगाल की मंत्री ने फटकार लगाई थी। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सवाल किया कि ममता बनर्जी प्रभावित लोगों को अपने घर में जगह देने के बजाय अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से उन्हें आश्रय देने के लिए क्यों कह रही हैं।

यह विवाद शहरी विकास और नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल के एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ। वीडियो में वह मध्य कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में फुटपाथ पर मिट्टी के तेल वाले चूल्हे पर अपने बच्चे के लिए दूध गर्म कर रही एक महिला को डांटती हुई दिखाई दी थीं।

पॉल पिछले सप्ताह निरीक्षण के लिए वहां गई थीं। उन्होंने महिला को चूल्हा बुझाने और फुटपाथ खाली करने का निर्देश दिया था।

इस घटना पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ विपक्षी दलों की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया कि कोई मंत्री भूखे बच्चे को दूध पीने से कैसे रोक सकती हैं।

बनर्जी ने घटना की निंदा करते हुए पॉल का नाम लिए बिना सोशल मीडिया मंच‘फेसबुक’ पर कहा, ‘‘किसी भी जनप्रतिनिधि को गरीब लोगों के प्रति नफरत भरी बात करना शोभा नहीं देता। गरीब होना कोई अपराध नहीं है। सड़क पर अपने बच्चे के लिए दूध गर्म कर रही मां मजबूर थी और उसे इतना करने की भी अनुमति नहीं दी गई। दूध फेंकते समय क्या आपको बुरा नहीं लगा? हमें याद रखना चाहिए कि मां का शाप सबसे बड़ा शाप होता है।’’

गरीब परिवार की मदद की पेशकश करते हुए बनर्जी ने कहा कि अगर फुटपाथ पर रहने वाला परिवार सहमति जताए, तो वह अपने किसी पार्टी कार्यकर्ता के घर में उनके लिए रहने की जगह का इंतजाम करेंगी, उन्हें भोजन उपलब्ध कराएंगी और बच्चे की आगे की पढ़ाई की पूरी जिम्मेदारी लेंगी।

बनर्जी पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय नबान्न में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘वह उन्हें अपने ही घर में रखकर उनकी देखभाल क्यों नहीं करतीं?’’

उन्होंने कहा, ‘‘हालीशहर में उन्हें (बनर्जी को) अपने ही पार्टी कार्यकर्ता के घर में जाने की अनुमति नहीं दी गई थी। मृतक के परिवार ने मुझसे बात की थी। उन्होंने आर्थिक सहायता स्वीकार की। मैंने उन्हें नौकरी की पेशकश की और उन्होंने जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए।’’

अधिकारी उत्तर 24 परगना जिले के हालीशहर में टीएमसी के एक कार्यकर्ता के परिवार से अपनी मुलाकात का जिक्र कर रहे थे। उस कार्यकर्ता की इसी महीने की शुरुआत में पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी।

बनर्जी ने भी शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की थी। बाद में दोनों नेताओं की मुलाकातें राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गईं और दोनों पक्षों ने अपने-अपने राहत व मदद के प्रयासों को सामने रखा।

अधिकारी ने सोमवार को कहा, ‘‘उनके अपने पार्टी कार्यकर्ता भी उन पर भरोसा नहीं करते। इस तरह के बयान देने का क्या मतलब है?’’

टीएमसी प्रमुख पर तीखा हमला करते हुए अधिकारी ने कहा, ‘‘अब उनकी उम्र काफी हो गई है और उन्हें कम बोलना चाहिए।’’

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप