गुवाहाटी, 24 अगस्त (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए दावा किया कि वह महिला अधिकारों के पैरोकार नहीं, बल्कि ‘‘सिर्फ एक हिंदू विरोधी’’ हैं।
गांधी ने शनिवार को महाराष्ट्र में छात्राओं के साथ संवाद के दौरान ‘‘मनुस्मृति मानसिकता’’ की आलोचना की थी, छात्राओं से ‘‘पितृसत्ता को खत्म करने’’ का आह्वान किया था और कहा था कि महिलाएं स्वयं के अधीन हैं और अपने पिता, पति या पुत्रों के नहीं।
शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि गांधी महिला सशक्तीकरण के मुद्दे का इस्तेमाल हिंदू धर्म को निशाना बनाने और बदनाम करने के सुविधाजनक बहाने के तौर पर कर रहे हैं।
शर्मा ने कहा, ‘‘जरा सोचिए: उन्होंने शरिया के तहत कायम पितृसत्तात्मक और मध्ययुगीन प्रथाओं के खिलाफ इसी तरह कितनी बार आक्रोश के साथ आवाज उठाई है? कभी नहीं।’’
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा, ‘‘जबकि शरिया इस्लामी न्यायशास्त्र का आधार है, वहीं मनुस्मृति को हिंदू धर्म में ऐसी कोई धार्मिक ग्रंथ के रूप में प्रामाणिकता नहीं है। यह हिंदुओं के लिए कोई सार्वभौमिक रूप से बाध्यकारी संहिता भी नहीं है।’’
शर्मा ने सवाल किया, ‘‘राहुल गांधी कितनी बार मनुस्मृति पर हमला करते हैं और कितनी बार उसी जोश के साथ शरिया पर हमला करते हैं?’’
उन्होंने दावा किया कि हिंदू धर्म की स्थायी ताकत उसकी समय के साथ ‘‘विकसित होने, सुधार करने और स्वयं को ढालने की अद्वितीय क्षमता’’ में निहित है—‘‘जैसा कि यह सहस्राब्दियों से करता आया है और अनंत काल तक करता रहेगा।’’
शर्मा ने कहा, ‘‘इसलिए हर हिंदू को यह पूछना चाहिए कि राहुल गांधी की असली मंशा क्या है—महिला अधिकारों का समर्थन करना या उन्हें हिंदू धर्म को बदनाम करने के बहाने के तौर पर इस्तेमाल करना?’’
मुख्यमंत्री शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के अपने रिकॉर्ड को देखते हुए महिला अधिकारों को लेकर उसके बयान खोखले लगते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने शाह बानो फैसले के प्रभाव को पलटकर हमारी माताओं और बहनों के साथ विश्वासघात किया। उन्होंने तीन तलाक के खिलाफ कानून का विरोध किया।’’
शाह बानो बेगम मामले में उच्चतम न्यायालय ने 1985 में तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता पाने का अधिकार दिया था। मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने 1986 में एक कानून बनाया, जिसने शाह बानो मामले में शीर्ष अदालत के फैसले को निष्प्रभावी कर दिया।
शर्मा ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में सत्ता से चिपके रहने के लिए राहुल गांधी की पार्टी ने यह सुनिश्चित किया कि राज्य मंत्रिमंडल में एक भी महिला को जगह न मिले।
उन्होंने कहा, ‘‘तो राहुल गांधी के लिए एक सीधी चुनौती है : अगर महिला समानता वास्तव में राजनीति से ऊपर है, तो क्या वह ऐसे समान नागरिक संहिता का स्पष्ट रूप से समर्थन करेंगे, जो धर्म से परे समान अधिकारों की गारंटी देती है? या फिर ‘महिला अधिकारों’ का उनका विचार हिंदू धर्म पर हमला करने तक ही सीमित रहेगा?’’
भाषा अमित माधव
माधव