नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को गत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हाफिज राशिद अहमद चौधरी की चुनाव याचिका को बहाल कर दिया।
इस याचिका में असम की करीमगंज लोकसभा सीट से 2024 का चुनाव जीतने वाले भाजपा के कृपानाथ मल्लाह के निर्वाचन को चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने चौधरी की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि उसे चुनाव याचिका खारिज किये जाने के चार अप्रैल 2025 के गौहाटी उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखने का कोई कारण नहीं दिखता।
पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए कहा, “हम चुनाव याचिका को उच्च न्यायालय की फाइलों में बहाल करते हैं, ताकि ऊपर बताए अनुसार उसपर विचार किया जा सके।”
पीठ ने कहा कि भ्रष्ट आचरण के आरोप वैधानिक आवश्यकताओं का सख्ती से पालन अनिवार्य बनाते हैं। साथ ही, निर्धारित प्राधिकारी द्वारा सत्यापित तथा चुनाव याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर से सत्य प्रति के रूप में प्रमाणित ऐसी प्रति, जो निर्वाचित उम्मीदवार को उपलब्ध कराई गई हो, अनिवार्य शर्त मानी गयी है।
भ्रष्ट आचरण के आरोप साबित होने पर अधिकतम छह वर्ष की अवधि के लिए अयोग्यता के रूप में दीवानी परिणाम हो सकते हैं।
पीठ ने कहा कि अदालत के एक पूर्व फैसले में यह माना गया था कि सार्वभौमिक रूप से लागू होने वाला कोई सामान्य सिद्धांत निर्धारित नहीं किया जा सकता और स्पष्ट रूप से यह भी कहा गया था कि केवल पर्याप्त अनुपालन भी काफी नहीं होगा।
पीठ ने कहा, “वर्तमान मामले में यह निर्विवाद है कि फॉर्म-25 को शपथपत्र आयुक्त के समक्ष सत्यापित किया गया था, जैसा कि अदालत के समक्ष मूल प्रति में उपलब्ध है। इतना कहना पर्याप्त है कि उच्च न्यायालय यह सत्यापित करे कि शपथ पर किए गए सत्यापन का विधिवत प्रमाणीकरण उपलब्ध है या नहीं। यदि ऐसा प्रमाणीकरण उपलब्ध है, तो मामले की योग्यता के आधार पर आगे कार्यवाही की जाए। यदि प्रमाणीकरण उपलब्ध नहीं है, तो भ्रष्ट आचरण के आरोपों को आगे बढ़ाने की अनुमति न दी जाए और यदि कोई अन्य आधार प्रस्तुत किए गए हैं, तो उनपर गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाए।”
पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत यह स्पष्ट कर चुकी है कि भ्रष्ट आचरण के आरोपों को पूरी तरह और ठोस रूप से साबित करना होता है तथा आरोपों में अस्पष्टता होने पर चुनाव याचिका दोषपूर्ण हो जाती है। ऐसी स्थिति में, यदि निर्वाचित उम्मीदवार को दी गई प्रति में महत्वपूर्ण और गंभीर प्रकृति की गलतियां हों, तो याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जा सकता है।
चौधरी ने पिछले साल चार अप्रैल को गौहाटी उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनकी याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि चुनाव याचिका निर्वाचित उम्मीदवार को उचित तरीके से नहीं दी गई थी, उसके कुछ पृष्ठों का विधिवत सत्यापन नहीं किया गया था और कुछ पृष्ठ गायब थे।
मल्लाह के निर्वाचन को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय के समक्ष दायर अपनी याचिका में चौधरी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत भ्रष्ट आचरण किए जाने का आरोप लगाया था।
मल्लाह ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन न किए जाने का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया था और इसे पूरी तरह खारिज करने का अनुरोध किया था ।
चौधरी 2024 के लोकसभा चुनाव में करीमगंज से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार मल्लाह से 18,000 से अधिक मतों के अंतर से हार गए थे।
भाषा रंजन सुरेश
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