नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व पर आधारित कार्टून, व्यंग्य या ‘पैरोडी’ का इस्तेमाल व्यावसायिक फायदे के लिए न किया जा रहा हो तो उन पर व्यक्तित्व अधिकारों के नाम पर रोक लगाने का आग्रह नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह टिप्पणी फिजिक्स वाला के संस्थापक अलख पांडे की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। पांडे ने विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर अपने व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों के कथित उल्लंघन का आरोप लगाया था।
पांडे ने आरोप लगाया था कि कई इंटरनेट मंच और उपयोगकर्ता सोशल मीडिया पोस्ट, स्टिकर पैक, वीडियो, वेबसाइट और ऐसे ही अन्य माध्यमों से उनके नाम, तस्वीर आदि का इस्तेमाल करके कमाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से कुछ चीजें अश्लील और आपत्तिजनक हैं।
पांच अगस्त को सुनाये गये अंतरिम आदेश में न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी ने कहा कि वह पांडे को तीन तरह के उल्लंघनों से सुरक्षा देते हैं, जिनमें यौन रूप से अश्लील सामग्री, बिना लाइसेंस के उनके व्यक्तित्व का इस्तेमाल करके कमाई करने वाली सामग्री और उनकी पहचान की नकल करना शामिल हैं।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस अदालत की राय में, मौजूदा मामले में जिस तरह व्यक्तित्व अधिकारों का दावा किया गया है, वह बहुत व्यापक हो सकता है और इसलिए इसका गलत इस्तेमाल होने की आशंका है।’’
अदालत ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करना चाहती है कि व्यक्तित्व अधिकारों का इस्तेमाल किसी के गलत कामों से जुड़ी जानकारी के प्रसार को रोकने या अभिव्यक्ति के किसी रूप को खत्म करने के लिए न किया जाए।
अदालत ने कहा, ‘‘मौजूदा मामले में अदालत वादी को केवल उन तीन तरह के उल्लंघनों से सुरक्षा देने के लिए सहमत है, जिनकी शिकायत याचिका में की गई है।’’
अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिनेता अभिषेक बच्चन व सलमान खान, आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर, पत्रकार सुधीर चौधरी, ‘पॉडकास्टर’ राज शमानी, आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और क्रिकेटर अभिषेक शर्मा समेत कई सार्वजनिक हस्तियां अपने व्यक्तित्व और प्रचार संबंधी अधिकारों की सुरक्षा की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का रुख कर चुकी हैं।
उच्च न्यायालय ने उन्हें अंतरिम राहत दी है।
भाषा जोहेब माधव
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