नयी दिल्ली, 24 अगस्त (भाषा) दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के करीब 100 चिकित्सकों ने यहां आयोजित एक सम्मेलन में चिकित्सा के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे नवीनतम अनुसंधान, उभरती प्रौद्योगिकी और उपचार के नए तरीकों पर चर्चा की।
‘पीएचवाईफाईकॉन 2026’ में चिकित्सकों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने अपने चिकित्सकीय अनुभव और विचार साझा किए।
सम्मेलन में मोटापा और मधुमेह, हृदय की गति नियंत्रित करने की प्रौद्योगिकी, हृदय संबंधी उपचार, प्रोस्टेट के लिए कम चीर-फाड़ वाली प्रक्रियाएं, एंटीबायोटिक दवाओं के उचित इस्तेमाल और बुजुर्गों की देखभाल जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों ने मधुमेह के उपचार के नए विकल्पों, आनुवंशिक और व्यक्ति-केंद्रित उपचार पद्धतियों, मरीजों की जांच और देखभाल में कृत्रिम मेधा (एआई) के इस्तेमाल तथा हृदय और गुर्दे की बीमारियों के बीच संबंध पर भी विचार साझा किए।
हृदय तथा फेफड़ा प्रतिरोपण विशेषज्ञ डॉ. राहुल चंदोला ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं केवल अस्पतालों और क्लिनिक तक सीमित नहीं रहनी चाहिए और मरीजों के घर लौटने के बाद भी उनकी लगातार निगरानी की जरूरत है।
स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मंच ‘आईलाइव कनेक्ट’ के संस्थापक चंदोला ने बताया कि यह मंच एक पहनने योग्य बायोसेंसर की मदद से ईसीजी, हृदय गति, श्वसन दर, रक्त में ऑक्सीजन का स्तर, तापमान और रक्तचाप के रुझान जैसे स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े लगातार दर्ज करता है। यह जानकारी चिकित्सकों की चौबीसों घंटे निगरानी वाले चिकित्सा नियंत्रण केंद्र तक भेजी जाती है।
मैक्स साकेत सीटीवीएस के चेयरमैन एवं प्रमुख डॉ. रजनेश मल्होत्रा ने कहा कि उन्नत इमेजिंग और कृत्रिम मेधा के जरिए घाव की सतह के नीचे चल रही प्रक्रियाओं को समझने तथा पारंपरिक दृश्य आकलन से आगे बढ़कर उपचार करने पर जोर दिया गया।
मणिपाल अस्पताल, द्वारका के हृदय विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. युगल किशोर मिश्रा और मैक्स हेल्थकेयर, साकेत के एंडोक्रिनोलॉजी एवं डायबिटीज विभाग के ग्रुप चेयरमैन डॉ. अम्बरीश मित्तल भी सम्मेलन में मौजूद रहे।
भाषा खारी माधव
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