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भारत में वैश्विक पोत निर्माण का केंद्र बनने की क्षमता : राजनाथ सिंह

कोलकाता, 23 अगस्त (भाषा) रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत वैश्विक पोत निर्माण का केंद्र बनने में सक्षम है और पारंपरिक जहाज निर्माण वाले देशों में पैदा हुए ‘‘खालीपन’’ का लाभ उठा सकता है।

सिंह गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) और यंत्र इंडिया लिमिटेड की पांच विस्तार परियोजनाओं की यहां ऑनलाइन माध्यम से आधारशिला रखने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि पोत निर्माण प्रौद्योगिकी में तेजी से विकास हो रहा है।

सिंह ने कहा कि पारंपरिक पोत निर्माता धीरे-धीरे उत्पादन कम कर रहे हैं और भारत इस मौके का लाभ उठा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत इस अवसर का लाभ लेकर वैश्विक पोत निर्माण केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करने में सक्षम है।’’

उन्होंने इसके लिए तीन क्षेत्रों—डिजाइन, विनिर्माण और रखरखाव, मरम्मत एवं ओवरहॉल (एमआरओ)—पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि जहाज निर्माण क्षेत्र में क्षमता के विरोधाभास को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में जहाजों की मांग बढ़ रही है, चाहे वे युद्धपोत हों, तेल टैंकर हों या अन्य वाणिज्यिक जहाज।

उन्होंने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे पारंपरिक जहाज निर्माण वाले देशों ने पिछले कुछ दशकों में कई कारणों से अपनी जहाज निर्माण क्षमता धीरे-धीरे कम की है। उन्होंने कहा कि इनमें श्रम लागत का अधिक होना और पुराने जहाज निर्माण कारखानों का आधुनिकीकरण नहीं होना शामिल है।

सिंह ने कहा कि देश के पास बड़ी संख्या में कार्यबल और इस्पात कंपनियां हैं, साथ ही नई तकनीकों को अपनाने की इच्छाशक्ति भी है। इस कार्यक्रम में उनके साथ पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि भारत बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग और आईटी विशेषज्ञों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा कुशल कार्यबल की मदद से विश्वस्तरीय जहाज डिजाइन केंद्र बन सकता है। सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है। इन परियोजनाओं में जीआरएसई की तीन और ‘यंत्र इंडिया’ की दो योजनाएं शामिल हैं।

सिंह ने कहा, “पश्चिम बंगाल में राज्य के विकास के लिए बदलाव आया है। राज्य में कारखानों के बंद होने और तालाबंदी की खबरों की जगह अब नई परियोजनाओं के शुरू होने की खबरें आ रही हैं।”

उन्होंने कहा कि यह बदलते भारत की तस्वीर है और उन्होंने अधिकारी को “काम करके दिखाने वाले मुख्यमंत्री” के रूप में सराहा।

शुभेंदु ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की पिछली सरकारों ने राज्य के विकास के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम नहीं किया।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल की पिछली सरकारों ने राज्य के विकास के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम नहीं किया। 50 साल की नकारात्मकता खत्म हो गई है और हमारी ‘डबल-इंजन’ सरकार अब यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य आगे बढ़े।’’

जीआरएसई कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए जीआरएसई ने पोत बनाने और उनकी मरम्मत करने की अपनी क्षमता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह, कोलकाता (एसएमपीके) के साथ पट्टा समझौता किए हैं। इस समझौते के तहत हुगली नदी के दोनों किनारों पर दो छोटे शिपयार्ड और रायचक में नदी के किनारे 32 एकड़ जमीन ली गई है।

उन्होंने कहा कि रायचक सुविधा को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ जहाज बनाने के केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा।

सिंह ने कहा, ‘‘रायचक संयंत्र 200 मीटर लंबे युद्धपोतों का निर्माण करने में सक्षम होगा, जिससे जीआरएसई को अगली पीढ़ी के विध्वंसक युद्धपोतों के लिए बोली लगाने में मदद मिलेगी।’’

अधिकारी ने बताया कि ईशापुर में यंत्र इंडिया की मेटल एंड स्टील फैक्टरी (एमएसएफ) में 750 करोड़ रुपये से अधिक के कुल निवेश वाली दो सुविधाएं, देश में ही धातु और रक्षा से जुड़े विनिर्माण मजबूत करेंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ये परियोजनाएं जीआरएसई की क्षमताओं को मजबूत करेंगी और साथ ही रोजगार सृजित करके तथा सहायक उद्योगों, खासकर एमएसएमई के ​​लिए अधिक अवसर पैदा करके पश्चिम बंगाल के औद्योगिक परिवेशी तंत्र को फिर से खड़ा करने में मदद करेंगी।’’

रक्षा मंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान रक्षा विनिर्माण में स्वदेशीकरण के महत्व को प्रदर्शित किया गया। उन्होंने कहा, “दुनिया ने भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता देखी है।”

उन्होंने कहा कि भविष्य में भी भारत की रक्षा जरूरतों को देश में ही पूरा करने की दिशा में पहल की कोई कमी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि रविवार को जिन पांच ब्राउनफील्ड परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है, वे देश की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ नीतियों को मजबूती देंगी।

पश्चिम बंगाल की हवा में “नई खुशबू” का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह खुशबू केवल सरकार में बदलाव की नहीं, बल्कि विकास, निवेश और नए अवसरों की भी है। उन्होंने कहा, “अगर इरादे स्पष्ट और सही हों और निवेश के लिए भरोसा हो, तो दुनिया की कोई ताकत विकास की गति को नहीं रोक सकती।”

सिंह ने कहा कि नयी सरकार के तहत राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग और कानून-व्यवस्था समेत हर क्षेत्र बेहतर दौर की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “यह भरोसा राष्ट्रीय सुरक्षा में भी दिखाई देता है।”

उन्होंने कहा कि अधिकारी सरकार ने इसे सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रक्षा मंत्री ने कहा कि नयी सरकार के सत्ता संभालने के 45 दिनों के भीतर ही भारत-बांग्लादेश सीमा के संवेदनशील हिस्सों में बाड़ लगाने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को 1,100 एकड़ जमीन हस्तांतरित की गई।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल ने देश को नये विचार, प्रतिभाएं और राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ भी दिया है। सिंह ने कहा, ‘‘अब समय आ गया है कि पश्चिम बंगाल देश को विकास की नई गति दे।’’

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल देश के पुनर्जागरण और राष्ट्रवाद का गवाह रहा है तथा यह भूमि कभी भारत की औद्योगिक क्रांति के केंद्र के रूप में जानी जाती थी।

सिंह ने कहा, ‘‘यह भूमि अब नए औद्योगिक पुनर्जागरण की ओर बढ़ रही है।’’

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने राज्य में तेजी से औद्योगिकीकरण और रोजगार सृजन का वादा किया था।

उन्होंने कहा कि विस्तार परियोजनाओं से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा होंगे और रोजगार का सृजन होगा।

सिंह ने कहा, “ये परियोजनाएं पश्चिम बंगाल की सामाजिक-आर्थिक प्रगति में एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगी।”

उन्होंने निजी क्षेत्र की कंपनियों से रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा कंपनियों के साथ निवेश बढ़ाने का भी आग्रह किया।

भाषा अमित नरेश

नरेश