मुंबई/नागपुर, 23 अगस्त (भाषा) राहुल गांधी के शनिवार को पुणे में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने रविवार को एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए। भाजपा ने इस कार्यक्रम को ‘राजनीतिक हास्य कार्यक्रम’ करार दिया, तो कांग्रेस ने कहा कि युवाओं के बीच राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा घबरा गई है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी इस विवाद में शामिल हो गए। उन्होंने महिलाओं के सशक्तीकरण की वकालत करने और संसद में महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह नेता प्रतिपक्ष के राजनीतिक रुख में व्याप्त पाखंड को दर्शाता है।
उन्होंने कांग्रेस को ‘दिखावा करने वालों और ऊंची आवाज में बोलने वालों की दिशाहीन पार्टी’ करार दिया, जो टेलीविजन पर प्रासंगिक बने रहने की कोशिश कर रही है।
यह विवाद शनिवार को पुणे में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के बाद शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में गांधी ने ‘मनुस्मृति मानसिकता’ की आलोचना की, महिलाओं से ‘पितृसत्ता को ध्वस्त’ करने का आह्वान किया और जंतर-मंतर पर महिला प्रदर्शनकारियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणी पर निशाना साधा।
भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के उपाध्यक्ष केशव उपाध्ये ने आरोप लगाया कि गांधी ने छात्रों की वास्तविक समस्याओं पर बात करने के बजाय सामान्य राजनीतिक भाषण दिया।
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि छात्रों को कॉलेज की बसों से कार्यक्रम में लाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने छात्रों के नाम पर आयोजित कार्यक्रम को राजनीतिक सभा में बदल दिया।
उपाध्ये ने कहा, “राहुल गांधी का पुणे में कार्यक्रम एक और राजनीतिक ‘हास्य कार्यक्रम’ था। कांग्रेस को मनुवाद की तलाश करने के बजाय पहले खुद आईना देखना चाहिए।”
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव सचिन सावंत ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि शनिवार को पुणे में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को मिली प्रतिक्रिया से भाजपा घबरा गई है और युवाओं के बीच राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता से सत्तारूढ़ दल की नींद उड़ गई है।
फडणवीस के नागपुर में ‘जेन जी’ के साथ संवाद कार्यक्रम पर निशाना साधते हुए सावंत ने आरोप लगाया कि राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन ने युवाओं के भविष्य की संभावनाओं को व्यवस्थित तरीके से नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा, ‘‘शायद मुख्यमंत्री उन्हें मनुस्मृति के महत्व के बारे में बताएंगे, यह बताएंगे कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था अच्छी है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) तथा विहिप तय करेंगे कि महिलाओं को क्या पहनना चाहिए, क्या बोलना चाहिए और किस तरह व्यवहार करना चाहिए।’’
सावंत ने कहा कि केवल खुद को ‘युवा आइकन’ कहने भर से कोई वास्तव में युवा आइकन नहीं बन जाता।
नागपुर में संवाददाताओं से बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को दूसरों को सशक्तीकरण का पाठ पढ़ाने से पहले यह बताना चाहिए कि वह महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने से क्यों इनकार करते हैं।
उन्होंने कहा कि देश की संवैधानिक प्रक्रिया में सर्वोच्च संस्था संसद है, जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि 33 प्रतिशत सांसद महिलाएं हों।
फडणवीस ने कहा, ‘‘पुणे आकर महिलाओं की बात करना और फिर उसी विधेयक का विरोध करना, जो उन्हें वास्तविक शक्ति देगा, राहुल गांधी के पाखंडपूर्ण रुख को दर्शाता है।”
उन्होंने कहा कि मंच से गांधी ने महिलाओं के सशक्तीकरण की बात तो की, लेकिन महिलाओं को अधिकार देने वाले सबसे महत्वपूर्ण कदम (महिला आरक्षण विधेयक) का उन्होंने विरोध किया और उसके खिलाफ मतदान किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वह महिलाओं को अधिकार नहीं देना चाहते। मेरा मानना है कि उनकी कथनी और करनी में अंतर है।’’
भाषा
संतोष नरेश
नरेश