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भारत में वैश्विक पोत निर्माण का केंद्र बनने की क्षमता : राजनाथ सिंह

कोलकाता, 23 अगस्त (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत पारंपरिक पोत निर्माण करने वाले देशों के बीच इस उद्योग को लेकर आई ‘शून्यता’ का लाभ उठाकर एक वैश्विक पोत निर्माण केंद्र बनने में सक्षम है।

सिंह यहां ऑनलाइन माध्यम से गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई)और यंत्र इंडिया लिमिटेड की पांच विस्तार परियोजनाओं की आधारशिला रखने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने यह भी कहा कि पोत निर्माण प्रौद्योगिकी में तेजी से विकास हो रहा है।

सिंह ने कहा कि पारंपरिक पोत निर्माता धीरे-धीरे उत्पादन कम कर रहे हैं और भारत इस मौके का लाभ उठा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत इस अवसर का लाभ लेकर वैश्विक पोत निर्माण केंद्र के रूप में खुद को स्थापित करने में सक्षम है।’’

सिंह ने कहा कि देश के पास बड़ी संख्या में कार्यबल और इस्पात कंपनियां हैं, साथ ही नई तकनीकों को अपनाने की इच्छाशक्ति भी है। कोलकाता में आयोजित इस कार्यक्रम में उनके साथ पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे।

सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत वाली पांच परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है। इन परियोजनाओं में जीआरएसई की तीन और ‘यंत्र इंडिया’ की दो विस्तार योजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल विकास के एक नए दौर की शुरुआत करने के लिए कदम उठाएगा। पश्चिम बंगाल में कारखानों के बंद होने और तालाबंदी की खबरों की जगह अब नयी परियोजनाओं की शुरुआत ने ले ली हैं।’’

शुभेंदु ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की पिछली सरकारों ने राज्य के विकास के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम नहीं किया।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम बंगाल की पिछली सरकारों ने राज्य के विकास के लिए केंद्र के साथ मिलकर काम नहीं किया। 50 साल की नकारात्मकता खत्म हो गई है और हमारी ‘डबल-इंजन’ सरकार अब यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य आगे बढ़े।’’

कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए जीआरएसई ने पोत बनाने और उनकी मरम्मत करने की अपनी क्षमता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह, कोलकाता (एसएमपीके) के साथ पट्टा समझौता किए हैं। इस समझौते के तहत हुगली नदी के दोनों किनारों पर दो छोटे शिपयार्ड और रायचक में नदी के किनारे 32 एकड़ जमीन ली गई है।

उन्होंने कहा कि रायचक सुविधा को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ जहाज बनाने के केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि ईशापुर में यंत्र इंडिया की मेटल एंड स्टील फैक्टरी (एमएसएफ) में 750 करोड़ रुपये से अधिक के कुल निवेश वाली दो सुविधाएं, देश में ही धातु और रक्षा से जुड़े विनिर्माण मजबूत करेंगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ये परियोजनाएं जीआरएसई की क्षमताओं को मजबूत करेंगे और साथ ही रोजगार सृजित करके तथा सहायक उद्योगों, खासकर एमएसएमई के ​​लिए अधिक अवसर पैदा करके पश्चिम बंगाल के औद्योगिक पारिस्थितिकी को फिर से खड़ा करने में मदद करेंगे।’’

भाषा धीरज नरेश

नरेश