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हांगकांग में तियानमेन स्मृति सभा के दो आयोजक राष्ट्रीय सुरक्षा मामले में दोषी करार

हांगकांग, 21 अगस्त (एपी) चीन में 1989 में ‘तियानमेन चौक’ पर की गई दमनकारी कार्रवाई की याद में हांगकांग में सभा आयोजित करने वाली संस्था के दो पूर्व सदस्यों को चीन की ओर से यहां लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत दर्ज मामले में शुक्रवार को दोषी करार दिया गया।

सरकार की ओर से नियुक्त न्यायाधीशों ने ‘हांगकांग अलायंस इन सपोर्ट ऑफ पैट्रियॉटिक डेमोक्रेटिक मूवमेंट्स ऑफ चाइना’ के पूर्व सदस्य ली च्युक-यान और चाउ हैंग-तुंग को लोगों को चीन के कम्युनिस्ट नेतृत्व को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए उकसाने का दोषी ठहराया। दोनों को इस मामले में अधिकतम 10 साल की जेल हो सकती है।

मामले में संगठन को भी दोषी ठहराया गया है।

तीनों न्यायाधीशों ने फैसला सुनाया कि संगठन का “एक दल की तानाशाही खत्म करने” का आह्वान संविधान के तहत सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व को समाप्त करने के उद्देश्य से था। उन्होंने कहा कि इस वाक्यांश में इस्तेमाल किए गए “खत्म करने” शब्द का अर्थ “उखाड़ फेंकना” और “कमजोर करना” है।

फैसले के बाद ली और चाउ मुस्कराते हुए और सार्वजनिक दीर्घा की ओर हाथ हिलाते हुए अदालत कक्ष से बाहर निकले। दोनों को बाद की तारीख में सजा सुनाए जाने की संभावना है।

यह फैसला हांगकांग के कभी सक्रिय रहे लोकतंत्र समर्थक आंदोलन से जुड़े हालिया मामलों में से एक है। हांगकांग और चीन के अधिकारियों की कार्रवाई के कारण यह आंदोलन अब काफी हद तक खत्म हो चुका है।

इस संगठन द्वारा तीन दशकों तक आयोजित स्मृति सभा चीन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने वाला एकमात्र ऐसा बड़ा सार्वजनिक आयोजन था, जिसमें हर साल हजारों लोग शामिल होते थे।

कोविड-19 महामारी के पहले वर्ष 2020 में इस आयोजन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके कुछ सप्ताह बाद बीजिंग ने 2019 में बड़े पैमाने पर हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए हांगकांग पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह मुकदमा हांगकांग में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बढ़ती पाबंदियों को दर्शाता है। ब्रिटेन का उपनिवेश रहा हांगकांग 1997 में चीन को सौंप दिया गया था।

लोकतांत्रिक सुधारों की मांग को लेकर तियानमेन चौक पर 1989 में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। चीनी सेना ने चार जून को प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की, जिसमें सैकड़ों और संभवत: हजारों लोग मारे गए।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश