नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को कहा कि विशाल आबादी, वैज्ञानिक प्रतिभाओं और बढ़ती अनुसंधान क्षमताओं के साथ ‘ब्रिक्स’ सहयोगात्मक, जिम्मेदार एवं भविष्योन्मुख नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए बेहतर स्थिति में है।
सिंह ने यह भी कहा कि ‘ब्रिक्स’ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) सहयोग अब एक मजबूत मंच के रूप में विकसित हो चुका है, जिसमें अनुसंधान सहयोग, नवाचार साझेदारी, युवा वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान और अनुसंधान बुनियादी ढांचे समेत कई क्षेत्र शामिल हैं।
मंत्री ने ब्रिक्स की 14वीं एसटीआई मंत्रिस्तरीय बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं।
सिंह ने कहा कि कृत्रिम मेधा, क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, जैव प्रौद्योगिकी, फोटोनिक्स, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के कारण दुनिया तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘जहां ये प्रौद्योगिकियां प्रगति के अभूतपूर्व अवसर उत्पन्न कर रही हैं, वहीं यह सुनिश्चित करने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भी आवश्यकता है कि नवाचार सुलभ, किफायती, विश्वसनीय बना रहे।’’
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत विज्ञान एवं नवाचार के लिए खुले, समावेशी और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन और तेजी से विस्तार कर रहे डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के पारिस्थितिकी तंत्र जैसी भारत की योजनाओं का भी उल्लेख किया।
सिंह ने कहा कि ये पहल ऐसे दृष्टिकोण को दर्शाती हैं, जिसमें नवाचार लोगों के जीवन को बेहतर बनाता है, सामाजिक मजबूती बढ़ाता है और मजबूत आर्थिक बदलाव में मदद करता है।
सिंह ने ‘ब्रिक्स’ साझेदार देशों से अग्रणी अनुसंधान, नवाचार के वित्तपोषण, प्रतिभाओं की आवाजाही, अनुसंधान बुनियादी ढांचे को साझा करने, स्टार्टअप साझेदारी और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में गहन सहयोग के लिए महत्वाकांक्षी लेकिन व्यावहारिक रास्ते तलाशने का आह्वान किया।
मंत्री ने कहा, ‘‘इस तरह का सहयोग भविष्य के लिए तैयार ‘ब्रिक्स’ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) व्यवस्था तैयार करने में मदद कर सकता है, जो वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील हो तथा ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को समर्थन दे।’’
भाषा जितेंद्र सुरेश
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