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विदेश व्यापार नीति में बदलाव से रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा: सीआईआई

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) विदेश व्यापार नीति के कुछ प्रावधानों में संशोधन से निर्यातकों के लिए विदेशों में की गई बिक्री का बिल भारतीय रुपये में बनाना और भुगतान प्राप्त करना आसान होने से व्यापार निपटान में रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने शुक्रवार को यह कहा।

सीआईआई की निर्यात-आयात संबंधी राष्ट्रीय समिति के चेयरमैन और पैटन इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक संजय बुधिया ने कहा कि भारतीय उद्योग इस दिशा में सरकार के साथ मिलकर काम करने और इस गति को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे वैश्विक व्यापार में भारत की प्रतिस्पर्धी क्षमता और मजबूत होगी।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की अधिसूचना से निर्यातकों के लिए विदेशों में किए जाने वाले लेनदेन का बिल भारतीय रुपये में बनाना और भुगतान प्राप्त करना आसान हो गया है।

उन्होंने कहा कि नेपाल और भूटान को छोड़कर अन्य देशों से संबंधित निर्यात का भुगतान यदि अधिकृत बैंकिंग माध्यमों से भारतीय रुपये में प्राप्त होता है, तो अब उसे विदेश व्यापार नीति के तहत मिलने वाले लाभ के लिए मान्य माना जाएगा। साथ ही, ऐसे भुगतान को विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतान के समान निर्यात दायित्वों को पूरा करने में भी गिना जाएगा।

बुधिया ने कहा, ‘‘यह रुपये के व्यापक अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों की दिशा में एक और कदम है। इससे व्यापार निपटान में रुपये के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और निर्यातकों को अधिक लचीलापन तथा निश्चितता मिलेगी।’’

इस बीच, एक सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि ये संशोधन भारतीय रुपये में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के निपटान को और आसान बनाते हैं तथा विदेश व्यापार नीति के प्रावधानों को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के मौजूदा ढांचे के अनुरूप बनाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘नेपाल और भूटान को छोड़कर किसी भी देश को किए गए निर्यात का भुगतान यदि निर्धारित बैंकिंग माध्यमों से भारतीय रुपये में प्राप्त होता है, तो ऐसे निर्यात विदेश व्यापार नीति के तहत निर्यात लाभ या प्रोत्साहन पाने और निर्यात दायित्वों को पूरा करने के लिए उसी तरह पात्र होंगे, जैसे विदेशी मुद्रा में भुगतान प्राप्त करने वाले निर्यात होते हैं।’’

अधिकारी के अनुसार, रुपये में भुगतान भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तियों के भारतीय रुपये खातों में जमा होना चाहिए। ये खाते विदेशी मुद्रा प्रबंधन (जमा) नियमों के तहत खोले गए होने चाहिए, जिनमें समय-समय पर संशोधन किया गया है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘इस कदम से भारतीय निर्यातकों और उनके विदेशी व्यापारिक साझेदारों को बिल बनाने और भुगतान के लिए मुद्रा चुनने में अधिक लचीलापन मिलने की उम्मीद है। साथ ही, अधिकृत बैंकिंग माध्यमों से भारतीय रुपये में वैध रूप से प्राप्त निर्यात भुगतान को विदेश व्यापार नीति के लाभ लेने में नुकसान की स्थिति में नहीं रखा जाएगा।’’

भाषा योगेश रमण

रमण