रांची, 21 अगस्त (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने बाल विकास परियोजना अधिकारियों (सीडीपीओ) की नियुक्तियां और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा के जरिए हुई भर्तियां रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं पर रोक लगा दी है।
अदालत ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं और 13वीं परीक्षाएं रद्द करने संबंधी अधिसूचनाओं पर बृहस्पतिवार को रोक लगाने के अलावा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगा दी।
याचिकाकर्ता के वकील इंद्रजीत सिन्हा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के जरिए हुई भर्तियां रद्द करने संबंधी अधिसूचना के अमल पर आज रोक लगा दी। इसके अलावा सीडीपीओ की नियुक्तियां रद्द करने संबंधी अधिसूचना पर भी रोक लगाई गई है।’’
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार सात सितंबर को जवाबी हलफनामा दाखिल करेगी और याचिकाकर्ता 14 सितंबर तक उस पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करेंगे।
सिन्हा ने कहा, ‘‘अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह 15 सितंबर को मामले की सुनवाई पहले से निर्धारित अपराह्न सवा दो बजे के बजाय दोपहर सवा 12 बजे करेगी। अदालत ने यह भी कहा कि मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया गया है।’’
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अमृतांश वत्स ने कहा कि अदालत का मानना है कि जरूरत पड़ने पर वह 16 सितंबर से रोजाना सुनवाई करके मामले का निस्तारण करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘सीडीपीओ और जेएसएससी-सीजीएल से जुड़े मामले आज पहली बार सुनवाई के लिए सूचीबद्ध थे। अदालत ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के आधार पर दोनों मामलों में अंतरिम रोक लगाई है।’’
वत्स ने कहा कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को लेकर पहले एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी।
रोक लगाये जाने संबंधी फैसले का स्वागत करते हुए, नियुक्तियां रद्द किए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे सरकारी कर्मचारियों ने कहा कि यह फैसला अनुचित था।
सचिवालय में पदस्थ अविनाश गुप्ता ने कहा, ‘‘हमारी परीक्षाएं अचानक रद्द किए जाने के फैसले का मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ा था। आज मुझे राहत मिली है कि मेरी 11 साल की कड़ी मेहनत पूरी तरह व्यर्थ नहीं गई। मैं 2015 से जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा की तैयारी कर रहा था। मुझे पूरा विश्वास है कि हमें न्याय मिलेगा और हमारी नौकरियां सुरक्षित रहेंगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से हमें सचिवालय के बाहर धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’
इस बीच, अदालत कक्ष उन सरकारी कर्मचारियों से खचाखच भरा हुआ था, जो इन अधिसूचनाओं से प्रभावित हुए थे। उच्च न्यायालय द्वारा अपना आदेश सुनाए जाने के बाद वहां खुशी का माहौल बन गया, जिससे जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के माध्यम से नियुक्त किए गए लगभग 2,000 कर्मचारियों को राहत मिली।
बृहस्पतिवार को दिये अपने आदेश में अदालत ने कहा कि जेपीएससी परीक्षा को कानून की उचित प्रक्रिया और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना रद्द कर दिया गया था।
आदेश की एक प्रति शुक्रवार को उपलब्ध कराई गई। इसमें कहा गया, “यह अदालत प्रथम दृष्टया यह मानती है कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना किसी नियमित नियुक्ति को प्रभावित या समाप्त नहीं किया जा सकता।’’
अदालत ने सरकारी अधिवक्ता को संबंधित विभाग को यह निर्देश देने को भी कहा कि याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ इस अधिसूचना से प्रभावित अन्य लोगों को भी रिट याचिका के निपटारे तक अपना काम जारी रखने की अनुमति दी जाए।
भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर 25 दिन से जारी आंदोलन के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार ने 18 अगस्त को 22 परीक्षाएं रद्द कर दी थीं और 2014 से आयोजित 23 अन्य परीक्षाओं की जांच का आदेश दिया था।
भाषा
देवेंद्र नरेश
नरेश