पटियाला/फिरोजपुर, 21 अगस्त (भाषा) ‘बंदी सिंहों’ की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा के ‘पंजाब बंद’ के आह्वान का शुक्रवार को व्यापक असर देखने को मिला। राज्य में कई जगहों पर दुकानें और बाजार बंद रहे, जबकि राजमार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ।
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अमृतसर, लुधियाना, मोहाली और जालंधर समेत पंजाब के कई शहरों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।
बंद का आह्वान सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक के लिए किया गया था।
‘बंदी सिंह’ से आशय उन सिख कैदियों से है, जिन्हें 1990 के दशक में पंजाब में आतंकवाद के दौर में हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के लिए दोषी ठहराया गया था।
पटियाला, मोहाली और जालंधर समेत कई जगहों पर कौमी इंसाफ मोर्चा और विभिन्न किसान संगठनों के समर्थकों ने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, जिससे कार्यालय जाने वाले लोगों और अन्य यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों समेत कई सड़कों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और अन्य वाहन खड़े कर मार्ग अवरुद्ध कर दिए। कुछ जगहों पर यात्री प्रदर्शनकारियों से उन्हें उनके गंतव्य तक जाने देने का अनुरोध करते नजर आए।
मोर्चा नेताओं ने कहा कि चिकित्सकीय आपात स्थिति, हवाई अड्डे की यात्रा, परीक्षाओं और विवाह समारोहों जैसी आवश्यक सेवाओं को बंद से छूट दी गई थी।
प्रदर्शनकारियों ने ‘बंदी सिंहों’ की रिहाई नहीं होने के विरोध में जालंधर, लाढोवाल (लुधियाना), होशियारपुर और फिरोजपुर में धरना दिया। उन्होंने शहरों में दोपहिया वाहनों से मार्च भी निकाला।
संगरूर, लुधियाना और मोहाली समेत कई जगहों पर दवा की दुकानों को छोड़कर सभी दुकानें बंद रहीं।
‘फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स’ ने बंद के मद्देनजर शुक्रवार को अवकाश की घोषणा की थी, जिसके कारण निजी स्कूल बंद रहे।
मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर लगाए गए अवरोधकों के पास चंडीगढ़ पुलिस के कर्मियों के अलावा द्रुत कार्रवाई बल (आरएएफ) के जवानों को भी तैनात किया गया था।
पटियाला में कौमी इंसाफ मोर्चा के नेता गुरचरण सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने मुख्य बस अड्डे के बाहर सड़क पर वाहन खड़े कर दिए, जिससे दोनों ओर यातायात ठप हो गया।
इस नाकेबंदी के कारण पटियाला से बठिंडा, फिरोजपुर, फरीदकोट और राज्य के अन्य हिस्सों की ओर जाने वाली बसों की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित हुई।
बस अड्डे से बाहर निकलने वाली बसों को भी रोक दिया गया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्री फंस गए।
पटियाला बस अड्डा शहर के प्रमुख परिवहन केंद्रों में से एक है और वहां रास्ता अवरुद्ध किए जाने से शहर के यातायात पर सीधा असर पड़ा।
फिरोजपुर में शहर और छावनी क्षेत्र के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में दुकानें बंद रहीं। व्यापारियों ने बंद का स्वेच्छा से समर्थन किया।
सुबह बैंक सहित कुछ प्रतिष्ठान खुले, लेकिन प्रदर्शनकारियों के वहां पहुंचने के बाद उन्हें बंद कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों ने जीरा और लुधियाना की ओर जाने वाले शहर के प्रमुख निकास मार्ग ‘चुंगी नंबर सात’ को भी अवरुद्ध कर दिया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए और उन सिख कैदियों की रिहाई की मांग की, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे अपनी सजा बहुत पहले ही पूरी कर चुके हैं।
बंद के कारण शहर की कई सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में यातायात काफी कम रहा।
फिरोजपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) भूपिंदर सिंह ने कहा कि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं और जिले में अभी तक किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।
पटियाला में गुरचरण सिंह ने कहा कि ‘बंदी सिंहों’ की रिहाई का मुद्दा काफी समय से लंबित है और सरकार को इस मामले पर गंभीरता से विचार कर निर्णायक कदम उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों को वर्षों तक सलाखों के पीछे नहीं रखा जाना चाहिए।
सिंह के मुताबिक, ऐसे कैदियों के लंबे समय से जेल में रहने के कारण उनके परिवारों को बहुत कष्ट झेलना पड़ रहा है और यह मामला सिख समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गया है।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी विशेष समुदाय या धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसका मकसद न्याय मांगना और संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों को लागू कराना है।
होशियारपुर में भी आम जनजीवन प्रभावित हुआ, जहां शुक्रवार को लगभग सभी दुकानें, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, बैंक और स्कूल-कॉलेज बंद रहे।
बंद के कारण जिले में सरकारी और निजी बसें भी सड़कों पर नहीं उतरीं।
होशियारपुर में प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर बिजली घर चौक, टांडा, हाजीपुर चौक, दसूया और अड्डा भंगाला सहित कई जगहों पर धरना दिया और यातायात अवरुद्ध किया।
बंद की वजह से होशियारपुर बस अड्डे से कोई बस नहीं संचालित की गई, जिससे पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में चिंतपूर्णी मंदिर जाने और वहां से लौटने वाले तीर्थयात्रियों को भी परेशानी हुई।
फरीदकोट से महिला श्रद्धालुओं के एक समूह के साथ चिंतपूर्णी मंदिर के दर्शन के लिए पहुंची सिमरजीत कौर (60) ने बताया कि उन्हें घर लौटने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
कौर ने कहा, “हमें बंद के आह्वान की जानकारी नहीं थी और होशियारपुर बस अड्डे पहुंचने के बाद ही इसके बारे में पता चला। बस सेवाएं दोपहर दो बजे के बाद ही बहाल होने की उम्मीद है, इसलिए हमारे पास इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”
फगवाड़ा में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर लुधियाना और जालंधर के बीच वाहनों को स्थानीय चीनी मिल से फगवाड़ा-नकोदर मार्ग की ओर मोड़ दिया गया, जिससे लोगों को अपेक्षाकृत अधिक दूरी तय करनी पड़ी और परेशानी हुई।
यातायात प्रभारी अमन कुमार ने बताया कि अन्य क्षेत्रों से आए प्रदर्शनकारियों ने जालंधर ग्रामीण जिले में एक भोजनालय के पास राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध कर दिया, जिसके कारण वाहनों को दूसरे मार्ग पर भेजा गया।
राजमार्ग के एक ओर माल से लदे ट्रकों और निजी वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं, क्योंकि उन्हें तीव्र बायां मोड़ लेना पड़ रहा था।
कौमी इंसाफ मोर्चा 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा के लिए पैरोल की मांग कर रहा है।
हवारा के अलावा मोर्चा बलवंत सिंह राजोआना और देविंदरपाल सिंह भुल्लर समेत अन्य ‘बंदी सिंहों’ की भी रिहाई की मांग कर रहा है।
राजोआना 1995 में बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी है, जबकि भुल्लर दिल्ली में 1993 में हुए बम विस्फोट के मामले में सजा काट रहा है।
भाषा पारुल मनीषा
मनीषा