विशाखापत्तनम, 21 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में शुक्रवार को संपन्न हुई। इस बैठक में कुछ इलाकों में जनसांख्यिकी असंतुलन और उससे सामाजिक समरता पर पड़ने वाले प्रभाव, जंतर-मंतर पर हाल में हुए युवाओं के विरोध-प्रदर्शन और उस दौरान सामने आई व्यवस्थागत कमियों जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। आरएसएस के वरिष्ठ नेता सीआर मुकुंद ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
मुकुंद ने संवाददाताओं से कहा कि कुछ समुदायों की आबादी में तेजी से वृद्धि हो रही है, जबकि कुछ अन्य की जनसंख्या घट रही है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय समन्वय बैठक में इस जनसांख्यिकी असंतुलन पर भी गंभीरता से चर्चा की गई।
मुकुंद ने कहा, “तीन दिन तक चली अखिल भारतीय समन्वय बैठक में जनसांख्यिकी असंतुलन, मादक पदार्थों की लत, युवाओं से जुड़े मुद्दों, व्यवस्थागत कमियों और सरकार तथा समाज की ओर से रचनात्मक प्रयासों की आवश्यकता जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।”
उन्होंने कहा कि प्रजनन दर में गिरावट आ रही है और कुछ क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय असंतुलन के कारण समाज में पहले से मौजूद समरसता में घट रही है।
मुकुंद ने बताया कि बैठक में छोटे शहरों, गांवों और स्कूलों में “मादक पदार्थ के बढ़ते प्रसार” पर चर्चा की गई, जिससे खासकर बच्चे और युवा प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने इस समस्या से निपटने के लिए समन्वित प्रयास करने पर जोर दिया।
दिल्ली में जंतर-मंतर पर हाल में हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बारे में मुकुंद ने कहा कि व्यवस्था में मौजूद कुछ कमियों पर भी चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि संघ चाहता है कि व्यवस्था ठीक ढंग से चले, जिसके लिए सरकार को कदम उठाने होंगे और समाज को जागरूक करना होगा।
मुकुंद ने बताया कि बैठक में युवाओं की चिंताओं, उनके भविष्य के लिए किए जाने वाले उपायों और देश के विकास में उनके योगदान जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
उन्होंने कहा, “हर साल 21 दिन के प्रशिक्षण शिविर में शामिल होने वाले हमारे युवा स्वयंसेवकों की संख्या 21,000 है। इस साल भी 21,000 युवा स्वयंसेवकों ने हमारे प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया।”
मुकुंद ने कहा कि देशभर में “आरएसएस की शाखाओं में रोजाना आने वाले लोगों में से 60 फीसदी से ज्यादा युवा हैं, ऐसे में हम उनके बीच काम कर रहे हैं। हमें पता है कि वे क्या सोचते हैं और कैसे सोचते हैं।”
उन्होंने कहा, “(आरएसएस की) शाखाओं में आने वाले युवा ही देश की पूरी युवा आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। इसी तरह, दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन करने वाले युवा भी देश की पूरी युवा आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं करते।”
आरएसएस नेता ने कहा कि भारत में 15-19 साल और 16-29 साल के आयु वर्ग में शामिल युवाओं की आबादी 35 करोड़ से ज्यादा है। उन्होंने युवाओं के साथ जुड़ाव, संवाद और उनकी भावनाओं को समझने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने की वकालत की।
मुकुंद ने कहा कि संघ और उससे जुड़े संगठन ऐसा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि भारत का भविष्य हमारे युवा मस्तिष्कों के हाथों में सुरक्षित है।”
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के प्रस्तावित दौरे के बारे में पूछे जाने पर मुकुंद ने कहा कि यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष समारोह और उसके वैश्विक संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि इसका मकसद भारत, हिंदुओं और आरएसएस के खिलाफ चलाए जा रहे दुष्प्रचार अभियान का मुकाबला करना है।
मुकुंद ने कहा कि अलग-अलग देशों के आम लोगों को जोड़ना, भ्रामक सूचनाओं से निपटना और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी ‘पूरी दुनिया एक परिवार है’ के संदेश को फैलाना भी इस यात्रा के उद्देश्यों में शामिल है।
उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान भागवत न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘सार्वभौमिक एकता’ कार्यक्रम में शामिल होंगे और टोरंटो तथा लंदन में सामुदायिक नेताओं की बैठकों में हिस्सा लेंगे, जहां वह ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का संदेश देंगे।
आरएसएस नेता ने कहा कि समन्वय बैठक न तो कोई कार्यकारी बैठक है और न ही कोई निर्णय लेने वाला मंच।
उन्होंने कहा, “इसका मुख्य उद्देश्य अलग-अलग संगठनों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे अपनी गतिविधियों, पिछले साल के अनुभवों, उपलब्धियों, चुनौतियों और समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रहे घटनाक्रमों के बारे में जानकारी साझा कर सकें।”
भाषा पारुल अविनाश
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