नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने जीवन और न्यायिक कामकाज के प्रति न्यायमूर्ति संजय करोल के दृष्टिकोण की बृहस्पतिवार को सराहना की। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय को निश्चित रूप से न्यायमूर्ति करोल की कमी खलेगी।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) की ओर से न्यायमूर्ति करोल के लिए आयोजित विदाई समारोह में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “एक सहयोगी के तौर पर आपको जानना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही है। यह अदालत निश्चित रूप से आपकी कमी महसूस करेगी।”
न्यायमूर्ति करोल 22 अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “मैं न्यायमूर्ति संजय करोल को केवल उनके पदों या उनके दिए गए फैसलों के जरिये ही नहीं, बल्कि साथ में बिताए गए कुछ ऐसे पलों के जरिये भी याद करना चाहूंगा, जो उस पद पर बैठे व्यक्ति की असली झलक दिखाते हैं।”
उन्होंने कहा कि आखिरकार कानून के करियर को तो घटनाओं के क्रम में समेटा जा सकता है, लेकिन कानून को समर्पित जीवन को नहीं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने उन दिनों को याद किया, जब वह हरियाणा के महाधिवक्ता थे और न्यायमूर्ति करोल हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता थे। उन्होंने कहा कि वे दोनों इस पेशे में कदम रखने के शुरुआती दिनों की कई सुखद यादें साझा करते हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बताया कि एक बार जब वे दोनों शिमला उच्च न्यायालय जा रहे थे, तब न्यायमूर्ति करोल ने एक दूधवाले को गिरते हुए देखा।
उन्होंने बताया, “न्यायमूर्ति करोल ने तुरंत अपनी कार रोकी, उस दूधवाले को आपात सहायता दी और यह सुनिश्चित किया कि उसे सही इलाज मिले। इसके बाद वह अदालत पहुंचे। इस घटना ने उनके व्यक्तित्व का एक ऐसा पहलू दिखाया, जो किसी बायोडाटा या फैसलों की सूची से पता नहीं चलता।”
इस मौके पर न्यायमूर्ति करोल ने कहा कि वकीलों को समझना चाहिए कि असली निखार अदालत कक्ष के अंदर आता है, बाहर नहीं।
उन्होंने कहा, “मैंने जो कुछ भी किया, जिंदगी को पूरी ठाठ-बाट के साथ जिया। मुझे कोई पछतावा नहीं है।”
भाषा पारुल वैभव
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