नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का बृहस्पतिवार को यहां सफदरजंग अस्पताल में निधन हो गया।
सज्जन कुमार वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।
लोकसभा की वेबसाइट के मुताबिक कुमार के परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है।
उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को दिल्ली में किया जाएगा।
अस्पताल के अनुसार कुमार को पुलिस पूर्वाह्न करीब 11 बजे जब अस्पताल लेकर पहुंची तो वह पूरी तरह होश में नहीं थे।
अस्पताल ने एक बयान में बताया, ‘‘सज्जन कुमार (81) को पुलिस पूर्वाह्न करीब 11 बजे वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंची। उन्हें तत्काल भर्ती किया गया और उपचार शुरू किए गए।’’
बयान के मुताबिक, ‘‘सभी आवश्यक चिकित्सा एवं जीवन रक्षक उपाय किए जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और दोपहर 12:30 बजे उनका निधन हो गया।’’
अस्पताल ने बताया, ‘‘वह (सज्जन कुमार) उच्च रक्तचाप और पार्किंसन रोग से पीड़ित थे तथा अतीत में कई बार अस्पताल में भर्ती हो चुके थे।’’ वह तिहाड़ जेल में बंद थे।
उच्चतम न्यायालय में बृहस्पतिवार को कुमार की उस याचिका पर सुनवाई होनी थी, जिसमें उन्होंने अपनी बीमार पत्नी के कारण चिकित्सा आधार पर तीन हफ्ते की पैरोल मांगी थी।
अदालत में सुनवाई के लिए पेश किये जाने वाले मुकदमों की सूची के मुताबिक कुमार की याचिका पर नियमित सूची के तहत सुनवाई होनी थी, लेकिन उस पर सुनवाई नहीं हो सकी।
कुमार ने दिल्ली के नांगलोई से नगर पार्षद के तौर पर राजनीति में कदम रखा और बाद में 1977 में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव बने। वह 1980, 1991 और 2004 में लोकसभा के लिए चुने गए।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाए जाने से जुड़े मामले में 17 दिसंबर, 2018 को कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
कुमार ने इस दोषसिद्धि के बाद कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। फरवरी 2025 में दिल्ली की एक अदालत ने दंगों के दौरान दो सिखों की हत्या से जुड़े एक अन्य मामले में भी पूर्व सांसद को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा 31 अक्टूबर 1984 को हत्या किए जाने के बाद दंगे भड़क गए थे। इन दंगों में देश भर में हज़ारों लोग मारे गए और दिल्ली सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों में से एक थी। ये दंगे पंजाब में भावनात्मक मुद्दा रहे हैं, जहां अगले साल चुनाव होने हैं।
1984 की हिंसा और उसके बाद की घटनाओं की जांच के लिए बनाए गए नानावटी आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 587 प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। इन 587 प्राथमिकी में से केवल 28 मामलों में ही सज़ा हुई। हत्या के लिए लगभग 50 लोगों को सजा हुई, जिनमें कुमार भी शामिल थे।
राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे व सांसद दीपेंद्र हुड्डा के अलावा कांग्रेस के अधिकतर बड़े नेता कुमार को श्रद्धांजलि देने से बचे।
चंडीगढ़ में भूपेंद्र हुड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में हरियाणा कांग्रेस विधायक दल ने कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कुमार को श्रद्धांजलि दी और उनकी याद में मौन भी रखा।
भाषा धीरज वैभव
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