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अमेरिका ने 20 निर्वासित प्रवासियों को लाइबेरिया भेजा

हारबेल (लाइबेरिया), 20 अगस्त (एपी) अमेरिका और लाइबेरिया के बीच हुए नए द्विपक्षीय समझौते के तहत 20 निर्वासित प्रवासियों का पहला समूह बृहस्पतिवार को लाइबेरिया पहुंचा। इस समझौते के तहत लाइबेरिया कुल 1,200 प्रवासियों को अपने यहां स्वीकार करने पर सहमत हुआ है।

प्रवासियों को लेकर आया विमान राजधानी मोनरोविया के पास स्थित रॉबर्ट्स अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा।

अमेरिका और लाइबेरिया के बीच हुआ यह समझौता ट्रंप प्रशासन के अवैध प्रवासन रोधी अभियान के तहत प्रवासियों को किसी तीसरे देश भेजने के अब तक के सबसे बड़े समझौतों में से एक माना जा रहा है।

लाइबेरिया के सूचना मंत्री जेरोलिमेक पियाह के अनुसार, अमेरिका से भेजे जाने वाले इन 1,200 प्रवासियों में केवल अफ्रीकी देशों के नागरिक ही नहीं, बल्कि उत्तर और दक्षिण अमेरिका तथा कैरिबियाई देशों के नागरिक भी शामिल हैं।

मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में लाइबेरिया के न्याय मंत्री नाटु ओसवाल्ड ट्वीह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इनमें से अधिकांश लोगों पर केवल वीजा और आव्रजन नियमों के उल्लंघन के मामले हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि ये प्रवासी चाहें तो लाइबेरिया में शरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ट्रंप प्रशासन ने कई गुप्त समझौतों के जरिए हजारों प्रवासियों को ऐसे 24 से अधिक देशों में भेजा है, जिनसे उनका कोई मूल संबंध नहीं रहा है। इनमें करीब 10 देश अफ्रीका में हैं।

आव्रजन मामलों के वकीलों का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन ‘तीसरे देश में निर्वासन’ की व्यवस्था का इस्तेमाल कानूनी उपाय के तौर पर कर रहा है, ताकि शरण मांगने वाले लोगों को परोक्ष रूप से उनके मूल देशों में लौटने के लिए मजबूर किया जा सके।

अक्सर इन प्रवासियों को ऐसे अनजान देशों में भेज दिया जाता है, जहां वे पहले कभी नहीं गए होते और जहां उनकी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंकाएं बनी रहती हैं।

ऐसी स्थिति में उनके पास मजबूर होकर उन्हीं मूल देशों में लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता, जहां से वे आए थे।

एपी खारी संतोष

संतोष