बेंगलुरु, 20 अगस्त (भाषा) कर्नाटक विधानसभा में बृहस्पतिवार को विपक्ष ने राज्य संचालित कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में धन के कथित गबन के आरोपों को लेकर मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया जिससे लगातार चौथे दिन कार्यवाही बाधित हुई।
सत्र शुरू होते ही विपक्षी भाजपा और जद(एस) ने यह मुद्दा उठाया और नागेंद्र को तत्काल मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की। विरोध के तौर पर विपक्षी सदस्य बांह पर काली पट्टियां बांधे नजर आए।
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, “हम पिछले चार दिनों से अनुसूचित जनजाति समुदाय के धन की लूट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। नागेंद्र के कारण सदन की कार्यवाही नहीं चल पा रही है। एक नागेंद्र के लिए 224 सदस्यों के विशेषाधिकार का उल्लंघन हो रहा है।”
विधानसभा अध्यक्ष जी.एस. पाटिल ने विपक्ष से चर्चा में शामिल होने और सरकार से जवाब मांगने को कहा।
अशोक ने कहा कि नागेंद्र को हटाए जाने के बाद ही चर्चा फिर से शुरू हो सकती है।
उन्होंने कहा, “मैं नागेंद्र के खिलाफ आरोपों पर पहले ही काफी चर्चा कर चुका हूं।”
उन्होंने उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर पर बुधवार को नागेंद्र को क्लीन चिट देकर सदन को “गुमराह” करने का आरोप लगाया, जबकि उनका नाम कई आरोप-पत्रों में शामिल है।
परमेश्वर ने बुधवार को सदन में नागेंद्र को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का बचाव किया था और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की आलोचना की थी।
अशोक ने आरोप लगाया, “सिद्धरमैया ने पहले नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटा दिया था, जबकि डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस आलाकमान ने उनसे पैसे लेकर उन्हें एक बार फिर मंत्री बना दिया।”
इसके बाद विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बहस हुई। इस दौरान कांग्रेस के कुछ विधायक जवाबी नारेबाजी करते नजर आए।
नारेबाजी के बीच अध्यक्ष ने प्रश्नकाल चलाया, जिसके दौरान कांग्रेस के कुछ विधायकों ने मंत्रियों से अपने सवालों के जवाब मांगे।
इसके बाद अध्यक्ष ने विपक्ष के नेता अशोक से सूखे पर चर्चा में हिस्सा लेने को कहा। इस पर उन्होंने जवाब दिया, “जब सरकार ने अभी तक सूखे की घोषणा ही नहीं की है और राहत के लिए धन जारी नहीं किया है तो चर्चा किस बात पर करें?”
सूखे की स्थिति पर बहस में हिस्सा लेने के अध्यक्ष के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्षी सदस्यों ने नागेंद्र को हटाने की मांग को लेकर नारेबाजी जारी रखी, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी।
विपक्षी दल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि यदि नागेंद्र को बर्खास्त नहीं किया गया तो वे मानसून सत्र की कार्यवाही नहीं चलने देंगे।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विपक्ष ने फिर नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। अध्यक्ष ने सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलने देने और चर्चा में हिस्सा लेने की बार-बार अपील की।
इसके जवाब में अशोक ने कहा कि अब गेंद सत्तापक्ष के पाले में है। उन्होंने कहा, “पहले सरकार राज्य को सूखा प्रभावित घोषित करे। उसके बाद हम चर्चा में हिस्सा लेंगे।”
अशोक ने आरोपों और मामलों के बावजूद नागेंद्र को मंत्री बनाए रखने पर सत्तारूढ़ कांग्रेस से सवाल किया और सुझाव दिया कि उनकी जगह ऐसे किसी अन्य दलित नेता को मंत्री बनाया जाए, जिसके खिलाफ इस तरह के आरोप न हों।
विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के जारी रहने के बीच अध्यक्ष ने सदन को दोपहर के भोजन तक के लिए स्थगित कर दिया।
दोपहर के भोजन के बाद सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से विरोध वापस लेने और सूखे समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा में हिस्सा लेने का आग्रह किया। इसके बावजूद अध्यक्ष ने विधेयकों पर विचार और उन्हें पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
नारेबाजी और विरोध के बीच सदन ने तीन विधेयक पारित किए। इनमें बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, नाडप्रभु केम्पेगौड़ा विरासत क्षेत्र विकास प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 और कर्नाटक नगर एवं ग्राम योजना (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।
इसके बाद अध्यक्ष ने कांग्रेस विधायकों ए.एस. पोन्नन्ना, थम्मैया और टी डी राजेगौड़ा को उनके द्वारा दिए गए नोटिस के तहत मुद्दे उठाने की अनुमति दी। इनमें केंद्र द्वारा पश्चिमी घाट के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र से संबंधित मसौदा अधिसूचना दोबारा जारी किए जाने का मुद्दा भी शामिल था।
अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के कारण हंगामा जारी रहा, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी।
सदन दोबारा शुरू होने पर भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ। नारेबाजी और हंगामे के बीच अध्यक्ष ने कांग्रेस के कुछ विधायकों को राज्य में सूखे की स्थिति पर बोलने की अनुमति दी।
इसके बाद अध्यक्ष ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लिए, जिनके दौरान कांग्रेस के कुछ विधायकों ने सरकार से जवाब मांगा। विपक्ष का कोई विधायक इन कार्यवाहियों में शामिल नहीं हुआ।
भाजपा और जद(एस) का विरोध जारी रहने के बीच अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।
नागेंद्र ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी विकास निगम में धन के कथित गबन के आरोपों के बाद पिछली सिद्धरमैया नीत मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें तीन अगस्त को शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। वह अब योजना एवं सांख्यिकी मंत्री हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाल्मीकि निगम घोटाला मामले में जुलाई 2024 में बल्लारी के विधायक को गिरफ्तार किया था और बेंगलुरु की विशेष अदालत ने उसी साल अक्टूबर में उन्हें जमानत दे दी थी।
इस मामले में ईडी और सीबीआई द्वारा दाखिल आरोप-पत्र में नागेंद्र का नाम शामिल है।
भाषा राखी प्रशांत
प्रशांत