भुवनेश्वर/ बालासोर, 19 अगस्त (भाषा) ओडिशा के छह जिलों में बाढ़ की स्थिति बुधवार को भी गंभीर बनी रही और 11.80 लाख से अधिक लोग अब भी प्रभावित हैं। वहीं, सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर बढ़ने से राज्य सरकार ने बालासोर जिले के प्रशासन को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा है।
ओडिशा के राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि हालांकि बुधवार दोपहर तक अधिकतर नदियों का जलस्तर स्थिर था या घट रहा था, लेकिन सुवर्णरेखा नदी में यह चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है।
मंत्री ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘भद्रक, जाजपुर और मयूरभंज के जिला प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है, लेकिन बालासोर के ज़िलाधिकारी को खास तौर पर हाई अलर्ट पर रखा गया है और जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। सुवर्णरेखा नदी में बाढ़ से घनी आबादी वाले बालियापाल, बास्ता और जलेश्वर प्रखंड प्रभावित हो सकते हैं।’’
बालासोर से मिली खबर के मुताबिक, बुधवार शाम पांच बजे नदी का जलस्तर 11.22 मीटर था, जबकि खतरे का निशान 10.36 मीटर है। झारखंड के गालूडीह और चांडिल बांधों से पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी रहने के कारण इसके और बढ़ने की आशंका है।
एक अधिकारी ने बताया, ‘‘भोगराई, जलेश्वर, बस्ता और बालियापाल प्रखंडों के निचले और नदी के किनारे वाले इलाकों में रहने वाले हजारों लोग पहले ही बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। प्रशासन ने बचाव दल तैनात किए हैं और इन इलाकों के लोगों से सतर्क रहने को कहा है।’’
जिले की अन्य नदियां, जैसे कि बुढ़ाबलंगा और जलका का जलस्तर कमोबेश स्थिर है, लेकिन कई गांव पहले ही बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं और सड़क संपर्क टूट गया है।
मंत्री ने कहा, ‘‘आज रात बालासोर के लिए बहुत अहम है क्योंकि आधी रात के आसपास सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर सबसे अधिक होने की आशंका है। जमीनी स्तर के अधिकारी पहले से ही बचाव और राहत टीम के साथ मौके पर मौजूद हैं।’’
पुजारी ने हालांकि कहा कि पिछले 24 घंटों में बहुत कम बारिश होने के कारण दूसरे जिलों को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि इस मॉनसून बाढ़ के दूसरे चक्र में अब तक 68 प्रखंडों के 1579 गांवों में 11.80 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा कि चार लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और बालासोर जिले में यह प्रक्रिया जारी है, जहां सुवर्णरेखा नदी तबाही मचा रही है।
बाढ़ जनित घटनाओं में जन हानि के सवाल पर मंत्री ने कहा कि अभी तक ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बालासोर से चार मवेशियों की मौत की खबर मिली है।
पड़ोसी ज़िलों भद्रक और जाजपुर में भी बाढ़ की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सलंदी नदी राजघाट में 17 मीटर के खतरे के निशान के मुकाबले 17.10 मीटर के स्तर पर बह रही थी।
वहीं, अखुआपाड़ा में बैतरणी नदी 18.65 मीटर के जलस्तर पर बह रही थी, जबकि वहां खतरे का निशान 18.33 मीटर है।
इस बीच, केंद्रपाड़ा जिला प्रशासन ने ब्राह्मणी नदी की वजह से आई बाढ़ से कुलासाही इलाके के एक आवासीय स्कूल से फंसे लगभग 250 छात्रों को बचाया। ये बच्चे चार दिनों तक बाढ़ के पानी के बीच फंसे रहे।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 21 अगस्त तक तीन दिनों के लिए भारी बारिश की कोई चेतावनी जारी नहीं की है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पहले कहा था कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बाढ़ से प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि प्रभावित लोगों को पका हुआ खाना समेत राहत सामग्री दी जा रही है और 171 बचाव दल तैनात किए गए हैं।
भाषा धीरज वैभव
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