नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और चार अन्य लोगों को तीन सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने जैन, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय और गैर सरकारी व्यक्तियों नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
अदालत ने डीजेबी के पूर्व निविदा परामर्शदाता अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा।
यह मामला जैन के दिल्ली के जलमंत्री रहने के दौरान ‘यूरोटेक एनवायर्नमेंटल प्राइवेट लिमिटेड’ को दिए गए एक ठेके से संबंधित है।
अदालत ने भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) के दावे का हवाला देते हुए कहा,‘‘जांच एजेंसी का आरोप है कि निविदा की शर्तों में हेर-फेर की गई थी, क्योंकि निविदा प्रक्रिया को जानबूझकर प्रौद्योगिकी केंद्रित बनाया गया था ताकि यूरोटेक एनवायर्नमेंटल प्राइवेट लिमिटेड को लाभ पहुंचाया जा सके।’’
अदालत ने संज्ञान लिया कि शुरू में पायलट अध्ययन की योजना बनाई गई थी जो कभी नहीं की गई और निविदा प्रक्रिया को केवल एक आईएफएएस प्रौद्योगिकी तक ही सीमित रखा गया।
अदालत ने कहा, ‘‘आरोप है कि संदर्भ शर्तें तैयार करते समय, प्रतिद्वंद्विता को बढ़ावा देने के लिए ऑक्सीजन ट्रांसफर एफिशिएंसी को 4 किलोग्राम/किलोवाट घंटा से घटाकर 2 किलोग्राम / किलोवाट घंटा करने का प्रस्ताव डीजेबी के सीईओ (उदित प्रकाश) और जल मंत्री (सत्येंद्र जैन) ने ठुकरा दिया था।’’
अदालत ने एसीबी के दावों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि ज़्यादातर बोली लगाने वालों के प्रक्रिया से बाहर हो जाने के बाद, एक शुद्धिपत्र के जरिए निविदा की प्रतिबंधात्मक शर्त को हटा दिया गया था।
इसमें कहा गया, ‘‘जांच एजेंसी की दलील है कि राष्ट्रीय हरित अभिकरण और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जल गुणवत्ता से जुड़े ज़रूरी मानकों में ढील दी गई थी। खासकर तीन अहम पैमानों पीएच, रसायनिक ऑक्सीजन मांग और कुल नाइट्रेट को बिना किसी ठोस वजह के हटा दिया गया था। इससे परियोजना देने वाली कंपनी की लागत तो कम हुई, लेकिन पर्यावरण को नुकसान पहुंचा।’’
अदालत ने कहा कि जैन ने कथित तौर पर बिना किसी तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन के रोहिणी मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) की क्षमता को 1.5 करोड़ गैलन प्रति दिन से बढ़ाकर 3.0 करोड़ गैलन प्रति दिन कर दिया, जिससे लागत में लगभग 123 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।
इसमें एसीबी के उस आरोप का भी ज़िक्र किया गया जिसमें कहा गया है कि कमीशन को बिचौलियों के जरिए अलग-अलग आरोपियों के बैंक खातों में भेजा गया था।
अदालत ने रेखांकित किया कि दिल्ली जल बोर्ड द्वारा 10 एसटीपी को बेहतर और उन्नयन करने के लिए ठेके देने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के संबंध में सतर्कता निदेशालय के 10 मई, 2024 की सिफारिश के बाद यह मामला दर्ज किया गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘इन 10 एसटीपी को चार चरणों में बांटा गया था, जिनका कुल निविदा मूल्य लगभग 1,943 करोड़ रुपये था। 11 मई 2024 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।’’
फैसले में जैन के बचाव में पेश की गई दलीलों का भी उल्लेख किया गया। दलील दी गई कि एक मंत्री के तौर जैन किसी खास विषय के विशेषज्ञ नहीं थे और उन्होंने केवल डीजेबी अधिकारियों (जिनमें अभियंता भी शामिल थे) की तकनीकी सिफारिशों और नोटिंग पर भरोसा किया था, इसलिए उनके फैसलों में कोई कमी नहीं निकाली जा सकती।
अदालत ने कहा, ‘‘उनका कहना है कि एसीबी या सतर्कता निदेशालय में से किसी ने भी ऐसी कोई रिश्वत, कमीशन या अपराध से मिली रकम का पता नहीं लगाया है जो सीधे उनसे जुड़ी हो, और उनकी हिरासत पूरी तरह से गलत है। उनकी दलील है कि मई 2022 में किसी दूसरे मामले में हिरासत में लिए जाने के बाद हुए वाणिज्यिक ठेके और निविदा के लिए बातचीत के लिए उन्हें ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने 2024 में हुई रीढ़ की हड्डी की सर्जरी के बाद से अपनी खराब सेहत का भी ज़िक्र किया है।’’
अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार सभी छह आरोपियों और उनके रिश्तेदारों को लिखित रूप में बताए गए थे। इसी के साथ अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज कर दिया कि गिरफ्तारी के कारणों का उल्लेख दस्तावेज के अंत में ही किया गया था।
अदालत ने कहा, ‘‘यहां यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस मामले में साज़िश के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (सरकारी कर्मचारी द्वारा विश्वास का आपराधिक उल्लंघन) भी लगाई गई है, और इसमें अधिकतम सजा आजीवन कारावास तक हो सकती है। इसलिए, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 35 (वे स्थितियां जिनमें पुलिस बिना वारंट के गिरफ़्तार कर सकती है) के उल्लंघन के बारे में आरोपियों की दलील शायद टिक न पाए।’’
अदालत ने पांचों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की एसीबी की अर्जी मंज़ूर करते हुए कहा, ‘‘पुलिस फ़ाइल और दोनों पक्षों की दलीलों को देखने के बाद, इस चरण में प्रथम दृष्टया यह नहीं कहा जा सकता कि गिरफ्तारी गैर कानूनी या अनुचित है।’’
हालांकि, अदालत ने आरोपियों की ज़मानत याचिका पर एसीबी को भी नोटिस जारी किया।
अदालत ने कहा, ‘‘इन जमानत याचिकाओं पर जांच एजेंसी को नोटिस जारी किया जा रहा है। जब इन याचिकाओं पर जवाब मिल जाएंगे, तो उन पर उचित रूप से विचार किया जाएगा।’’
श्रीवास्तव से हिरासत में पूछताछ के बारे में अदालत ने कहा कि निष्पक्ष जांच और उनके मोबाइल फोन की बरामदगी के लिए यह उचित और आवश्यक है, क्योंकि वह फोन सबूत का एक अहम हिस्सा हो सकता है।
भाषा धीरज वैभव
वैभव