कानपुर (उप्र), 19 अगस्त (भाषा) गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण कानपुर के बाढ़ संभावित इलाकों के करीब 176 गांवों को बुधवार को सतर्क कर दिया गया। पुलिस और जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ाने के साथ बचाव एवं राहत कार्यों की तैयारियां तेज कर दी हैं।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर करीब 35 चौकियां स्थापित की गई हैं।
लाल ने बताया कि 36 सदस्यीय राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम, एक पूर्ण बाढ़ राहत दल, करीब 100 प्रशिक्षित आपदा राहत गोताखोरों तथा होम गार्ड, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (पीएसी) और नागरिक पुलिस के जवानों को बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया है।
लाल ने कहा, ‘‘हमने गंगा के किनारे बाढ़ संभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया है और बचाव एवं राहत कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘नदी के किनारे और निचले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है, जबकि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए घाटों पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।’’
पिछली घटनाओं को देखते हुए नदी तट को साफ करा दिया गया है, जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को निर्धारित आश्रय स्थलों में जाने की सलाह दी गई है।
पुलिस लोगों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को उफनती नदी में उतरने से रोकने के लिए भी कड़ी निगरानी रख रही है।
अधिकारी ने बताया कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन के समन्वय से आपातकालीन नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं।
लाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक संसाधन तैयार रखे गए हैं।’’
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कानपुर बैराज के मापक केंद्र पर गंगा का जलस्तर ऊपरी धारा में 113.570 मीटर और निचली धारा में 113.420 मीटर है। वहां चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का स्तर 115 मीटर है।
एक अधिकारी ने बताया कि शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर 112.180 मीटर था, जबकि वहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है।
भाषा सं. जफर खारी
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