Breaking News

गंगा के बढ़ते जलस्तर पर एक्शन मोड में बिहार सरकार, CM सम्राट चौधरी ने दिया निर्देश     |   अमेरिकी दूत विटकॉफ और कुशनर मॉस्को पहुंचे, रूस-यूक्रेन के बीच शांति की पहल करेंगे     |   झीरम घाटी माओवादी हमला: छत्तीसगढ़ की NIA कोर्ट ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया     |   दिल्ली की मुख्यमंत्री ने जलभराव वाले इलाकों का निरीक्षण किया     |   रूस: अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि विटकॉफ और कुशनर के साथ बातचीत करेंगे पुतिन     |  

असम सरकार प्रधानमंत्री मोदी के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ दृष्टिकोण के अनुरूप काम कर रही: हिमंत

गुवाहाटी, 19 अगस्त (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” दृष्टिकोण के अनुरूप काम कर रही है, ताकि लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

कामरूप में एकीकृत जिला आयुक्त कार्यालय भवन के उद्घाटन के बाद हिमंत ने कहा कि सरकार की कोशिशों के बावजूद सचिवालय में बड़ी संख्या में फाइलें लंबित पड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए कई सेवाएं जिला आयुक्तों के कार्यालयों में स्थानांतरित की जा रही हैं।

हिमंत ने कहा कि अगर लोगों को सरकारी कार्यालयों में जाना पड़े, तो वहां उनकी समस्याओं का तुरंत और आसानी से समाधान हो जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हम सभी 35 जिलों में जिला आयुक्त कार्यालयों को जन-केंद्रित संस्थानों के रूप में विकसित करने के समग्र दृष्टिकोण के साथ काम कर रहे हैं, ताकि लोगों को सेवाएं तेजी से उपलब्ध कराई जा सकें।”

“न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” के प्रधानमंत्री मोदी के मंत्र का जिक्र करते हुए हिमंत ने कहा कि 2021 में असम का मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद उन्होंने एक अध्ययन करवाया था, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने लोग राज्य सचिवालय आते हैं और उनके वहां आने की क्या वजहें हैं।

हिमंत के मुताबिक, अध्ययन में पाया गया कि रोजाना करीब 5,000 से 6,000 लोग जनता भवन (राज्य सचिवालय) आते थे।

उन्होंने कहा कि 2022 में कई प्रशासनिक सुधार लागू किए गए, जिनके तहत सचिवालय से जिला आयुक्तों और मुख्य अभियंताओं के कार्यालयों तथा विभिन्न निदेशालयों को शक्तियों का हस्तांतरण किया गया।

हिमंत ने कहा कि इसके चलते सचिवालय आने वाले लोगों की संख्या में काफी कमी आई और अब रोजाना 600 से 700 लोग ही वहां पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिशों के बावजूद सचिवालय में अब भी बड़ी संख्या में फाइलें और आवेदन लंबित हैं और इस समस्या से निपटने के लिए कई सेवाओं को जिला आयुक्त कार्यालयों में स्थानांतरित करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

भाषा पारुल संतोष

संतोष