रांची, 19 अगस्त (भाषा) झारखंड सचिवालय में बुधवार को तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जब भर्ती परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद नौकरी से वंचित हुए बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए जबरन सचिवालय परिसर में दाखिल हो गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अभ्यर्थी सरकार के उस फैसले का विरोध कर रहे हैं, जिसके तहत झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी), झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) और एक बाहरी एजेंसी द्वारा आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा, 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए गए हैं।
हालांकि, पुलिस प्रशासन के अनुरोध के बाद परीक्षा रद्द करने का आदेश वापस लेने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी सचिवालय परिसर से बाहर निकल गए।
सफल अभ्यर्थियों के एक नेता ने कहा, 'हमने कानून को अपने हाथ में नहीं लेने का फैसला किया है। पुलिस प्रशासन ने एक या दो स्थान सुझाए हैं, जहां हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकते हैं। हमने सोमवार को आंदोलन शुरू किया था और जब तक जेएसएससी-सीजीएल रद्द करने के आदेश को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक इसे समाप्त नहीं किया जाएगा।'
हटिया के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) नीरज कुमार ने प्रदर्शनकारियों से सचिवालय परिसर छोड़ने की अपील की थी, क्योंकि उस इलाके में निषेधाज्ञा लागू थी।
कुमार ने पत्रकारों से कहा, 'इस इलाके में बीएनएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। आदेश का उल्लंघन करने पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती थी। हमने उन्हें अपने आंदोलन के लिए परिसर के बाहर कोई जगह चुनने का सुझाव दिया।'
इससे पहले, प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने राज्य सचिवालय परिसर के भीतर प्रदर्शन किया।
सरकारी विभाग में सहायक अनुभाग अधिकारी (एएसओ) के पद पर नियुक्त चंदन कुमार ने कहा, 'हम सोमवार से राज्य सचिवालय के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने हमारी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया। सरकार की ओर से परीक्षाएं रद्द करने की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद, अपनी मांगों को रखने के लिए हमारे पास सचिवालय परिसर में प्रवेश करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।'
एक अन्य एएसओ श्याम सुंदर मंडल ने कहा कि जब तक सरकार जेएसएससी-संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा रद्द करने के फैसले को वापस नहीं लेती, तब तक प्रदर्शनकारी अपना आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे।
मंडल ने कहा, 'हमने अपनी योग्यता के आधार पर परीक्षा उत्तीर्ण की है। किसी भी तरह की गड़बड़ी में हमारी कोई भूमिका नहीं है। सरकार को हमें सजा देने का कोई अधिकार नहीं है।'
एक अन्य अभ्यर्थी चांदनी ने कहा, 'हमने इस नौकरी के लिए सब कुछ छोड़ दिया। मैंने सालों तक कड़ी मेहनत की, परीक्षा उत्तीर्ण की, नियुक्ति पाई और महीनों से पूरी लगन से सरकार की सेवा कर रही हूं। अब हमारी नौकरी छीनना ऐसा लगता है जैसे हमारा भविष्य छीन लिया गया हो।'
अमित कुमार ने कहा, 'जो लोग कथित गड़बड़ियों में शामिल थे, उनके खिलाफ़ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अगर किसी ने धोखाधड़ी की है, तो उनकी पहचान करके उन्हें सजा दी जाए।’’
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर 26 दिनों से जारी छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द कर दीं और 2014 से राज्य लोक सेवा आयोग तथा एक बाहरी एजेंसी द्वारा आयोजित 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए।
सरकार के इस फैसले से वे अभ्यर्थी चिंतित हो गये, जिन्होंने इन परीक्षाओं में सफल होकर विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्ति पा ली थी।
रद्द की गई परीक्षाओं में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा भी शामिल है। इसके विरोध में सफल अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए हैं।
सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद घोषित इस फैसले के तहत मंगलवार देर रात जारी की गई आठ अधिसूचनाओं के माध्यम से कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक, तकनीकी और न्यायिक पदों की भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
भाषा
शुभम देवेंद्र
देवेंद्र