रांची, 19 अगस्त (भाषा) झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने बुधवार को अपना 26 दिन से जारी प्रदर्शन स्थगित कर दिया और राज्य सरकार को समस्याओं के समाधान के लिए दो महीने का समय दिया।
यह घोषणा झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत सरकार की ओर से मंगलवार को 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और 2014 से राज्य लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) तथा एक आउटसोर्स एजेंसी द्वारा कराई गई 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश के एक दिन बाद की गई।
‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ के एक नेता ने कहा, ‘‘हम अब आंदोलन स्थगित कर रहे हैं और सरकार को दो महीने की चेतावनी दे रहे हैं कि वह मुद्दों का समाधान करे और भर्ती परीक्षा में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराए।’’
छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मंच ने बताया कि यहां जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी प्रदर्शन के दौरान 15 दिन से अनशन कर रहे तीन प्रदर्शनकारियों - रूपेश कुमार पाल, सविता कुमारी और राहुल क्रांति - ने बुधवार को अनशन समाप्त कर दिया।
मंच के नेता रविंद्र पासवान ने कहा, ‘‘छात्रों के 26 दिन के आंदोलन के दबाव में झारखंड सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द कीं और 23 अन्य की जांच शुरू की।’’
प्रवक्ता पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि यदि मुद्दों का समाधान नहीं किया गया तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘हम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील करते हैं कि वह भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों को दोबारा होने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाएं।’’
साथ ही, उन्होंने 10 अगस्त को विधानसभा तक मार्च करने वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने और भर्ती परीक्षाओं के व्हिसलब्लोअर (गड़बड़ियों का खुलासा करने वाले) संतोष कुमार मस्ताना को वित्त विभाग में बहाल करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे उन सफल अभ्यर्थियों के प्रति सहानुभूति रखते हैं, जिनकी नौकरी रद्द परीक्षाओं के कारण खतरे में पड़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके लिए सरकार जिम्मेदार है।
इस बीच, परीक्षाएं रद्द किए जाने के फैसले से उन अभ्यर्थियों में चिंता फैल गई है, जिन्होंने इन परीक्षाओं में सफलता हासिल कर विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्ति पाई थी।
रद्द की गई परीक्षाओं में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा भी शामिल है। इसके बाद सफल अभ्यर्थियों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।
सोमवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद लिए गए फैसले और मंगलवार देर रात जारी आठ अधिसूचनाओं के तहत कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक, तकनीकी और न्यायिक पदों की भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया गया है।
जेएलकेएम नेता देवेंद्र मांझी ने भी सरकार के फैसले के बाद 16 दिन का अनशन समाप्त कर दिया था। उन्होंने कहा है कि वह जल्द ही आंदोलन का दूसरा चरण शुरू करेंगे।
रद्द की गई परीक्षाओं में औषधि निरीक्षक, सरकारी इंजीनियरिंग एवं मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्राध्यापक, सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों में व्याख्याता, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्र अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और बाल विकास परियोजना अधिकारी पदों की भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं।
सरकार ने कहा कि गड़बड़ी और अनियमितताओं के आरोपों के बीच भर्ती प्रक्रिया में भरोसा बहाल करने के लिए यह कदम जरूरी था।
हालांकि, इस फैसले के बाद जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा पास कर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में नियुक्त करीब 2,000 अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा परीक्षा रद्द करने की घोषणा के एक दिन बाद मंगलवार को उन्होंने राज्य सचिवालय से बिरसा चौक तक मार्च निकाला।
नियुक्त अभ्यर्थियों ने कहा कि वे जांच के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करने का विरोध करते हैं। उनका कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, न कि उन अभ्यर्थियों को सजा दी जानी चाहिए, जिन्होंने निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के जरिए नौकरी हासिल की है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उनमें से कई अभ्यर्थी वित्त, गृह, सड़क परिवहन, श्रम और सूचना एवं जनसंपर्क विभागों में काम कर रहे हैं।
परीक्षाएं रद्द करने के साथ ही सरकार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय से त्वरित अदालत गठित करने का अनुरोध करने का फैसला किया है। दोनों आयोगों में आंतरिक सतर्कता प्रकोष्ठ बनाने का भी प्रस्ताव है।
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जो जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में सुधार के सुझाव देगी। समिति को दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
यह समिति भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा करेगी और प्रश्नपत्र लीक, हेरफेर तथा अन्य गड़बड़ियों को रोकने के उपाय सुझाएगी।
इस बीच, कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच भी तेज कर दी गई है।
झारखंड सीआईडी ने मुख्य आरोपी अभय तिवारी की पत्नी सुषमा कुमारी और उसके भाई अक्षय तिवारी को कई घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया है।
तिवारी आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल का पूर्व कर्मचारी है और गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर तैनात था। उसे सीआईडी ने 22 जुलाई को गिरफ्तार किया था।
अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आया है कि तिवारी ने 13 वर्षों में करीब 12 प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। इनमें पुलिस, नौसेना, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और नॉर्दर्न कोलफील्ड्स द्वारा आयोजित परीक्षाएं शामिल हैं। जांचकर्ता उसके आवेदन पत्रों, दस्तावेजों, मूल्यांकन रिकॉर्ड और चयन संबंधी विवरणों की जांच कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि तिवारी ने जांचकर्ताओं को बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए कथित तौर पर अलग-अलग ‘रेट चार्ट’ का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें ‘‘भुगतान दो लाख रुपये से लेकर 70 लाख रुपये तक’’ होता था।
कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सोरेन से मुलाकात कर परीक्षाएं रद्द करने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे निष्पक्ष भर्ती की मांग कर रहे छात्रों के हितों की रक्षा होगी।
वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झामुमो नीत सरकार पर आरोप लगाया कि उसने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग स्वीकार किए बिना परीक्षाएं रद्द कर आंदोलनकारी छात्रों के साथ ‘‘धोखा’’ किया है।
भाषा शुभम शफीक
शफीक