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बीते वित्त वर्ष में बने यूएएन में से 79 प्रतिशत 18-30 वर्ष आयु वर्ग के

मुंबई, 19 अगस्त (भाषा) भारत में संगठित रोजगार को युवा कर्मचारी गति दे रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में बने नए ‘यूनिवर्सल अकाउंट नंबर’ (यूएएन) में से 79 प्रतिशत 18-30 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के हैं। बुधवार को जारी एक रिपोर्ट से यह निष्कर्ष निकला है।

इस आंकड़े से देश के कार्यबल में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत मिलता है।

कर्मचारी एवं कार्यबल समाधान कंपनी क्वेस कॉर्प की रिपोर्ट ‘पल्स 2025-26’ के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 57,000 से अधिक नए यूएएन बने थे। इन कुल यूएएन में से 79 प्रतिशत 18-30 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूएएन बनाने में 21-25 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से अधिक रही और यह संगठित रोजगार में प्रवेश करने वाला सबसे बड़ा आयु समूह रहा।

रिपोर्ट में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ), आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस), उद्योग संबंधी आंकड़ों और कार्यबल के रुझानों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें वित्त वर्ष 2024-25 में ईपीएफओ के नए सदस्यों में करीब 59 प्रतिशत लोग 18-25 वर्ष आयु वर्ग के थे। यह संगठित अर्थव्यवस्था के विस्तार में युवाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली बार रोजगार पाने वाले युवा संगठित रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत बन रहे हैं। ऐसे में कंपनियां शिक्षा से रोजगार तक युवाओं के बदलाव को बेहतर बनाने के लिए अप्रेंटिसशिप, प्रौद्योगिकी आधारित भर्ती और रोजगारपरक कौशल पर अधिक जोर दे रही हैं।

क्वेस कॉर्प के कार्यकारी निदेशक एवं समूह मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लोहित भाटिया ने कहा, “जिस पैमाने पर युवा भारत के संगठित कार्यबल में शामिल हो रहे हैं, वह नियोक्ताओं और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। कार्यक्षेत्र में नई पीढ़ी के प्रवेश के साथ ध्यान केवल भर्ती तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि रोजगारपरक क्षमता विकसित करने पर होना चाहिए। अप्रेंटिसशिप संगठित रोजगार में प्रवेश के सबसे प्रभावी माध्यमों में से एक बनकर उभर रही है। इससे युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल, कार्यस्थल का व्यावहारिक अनुभव और दीर्घकालिक करियर बनाने का आत्मविश्वास हासिल करने का अवसर मिलता है।”

भाषा यासिर अजय

अजय

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