रांची, 18 अगस्त (भाषा) झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने मंगलवार को उच्च न्यायालय में स्वीकार किया कि इस साल जनवरी में आयोजित की गई माध्यमिक आचार्य भर्ती परीक्षा के नतीजे तैयार करने के लिए इस्तेमाल की गई प्रणाली में त्रुटि थी।
आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि अंकों की गणना में अनधिकृत हस्तक्षेप हुआ था, जिसके कारण उसने उन उम्मीदवारों के लिए पुनः परीक्षा का आदेश दिया जिनके परिणाम प्रभावित हुए थे।
उच्च न्यायालय उन अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिन्हें दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए कहा गया था।
अदालत ने टिप्पणी की कि चूंकि आयोग ने परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में संभावित छेड़छाड़ की बात स्वीकार की है, इसलिए इस मामले की और जांच की जरूरत है।
अदालत ने कहा कि मामला गंभीर है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय में अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
याचिकाकर्ता अर्पणा कुमारी ने दलील दी कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई त्रुटियों के कारण उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
याचिका में दोबारा परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों की संख्या में अंतर की ओर भी इशारा किया गया। जेएसएससी ने पहले एक अधिसूचना जारी करके कहा था कि 2,819 उम्मीदवारों को दोबारा परीक्षा देनी होगी, लेकिन उच्च न्यायालय में दिए गए हलफनामे में 2,837 अभ्यर्थियों का ज़िक्र किया गया है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि इस अंतर से आयोग के बयानों में ‘भारी विरोधाभास’ झलकता है।
भाषा धीरज वैभव
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