जयपुर, 18 अगस्त (भाषा) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार को करीब 3,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया तथा राज्य के सात शहरों के लिए 71 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई।
इन परियोजनाओं में शहरी बुनियादी ढांचे, सीवरेज, यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से जुड़े प्रमुख कार्य शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ई-बस योजना के तहत 71 इलेक्ट्रिक बसों में से जयपुर और भीलवाड़ा के लिए 24 बसों को जयपुर से हरी झंडी दिखाई गई। अलवर, अजमेर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर के लिए 47 बसों को डिजिटल माध्यम से हरी झंडी दिखाई गई।
यहां हरिश्चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा कि इलेक्ट्रिक परिवहन आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और प्रदूषण मुक्त भविष्य का महत्वपूर्ण घटक बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विस्तार के साथ ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना और पीएम ई-ड्राइव जैसी पहलों से इलेक्ट्रिक वाहन पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हो रहा है।
कार्यक्रम के दौरान श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत 1,32,421 श्रमिकों और उनके आश्रितों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 154 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता भी हस्तांतरित की गई।
लोकार्पण की गईं परियोजनाओं में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय में 128-स्लाइस सीटी स्कैन मशीन और 1.5 टेस्ला एमआरआई मशीन, स्नातकोत्तर छात्रावास, सवाई मानसिंह अस्पताल के आयुष्मान टावर में हृदय एवं रक्तवाहिका विज्ञान संस्थान तथा चांदपोल स्थित जनाना अस्पताल में नया भर्ती रोगी विभाग (आईपीडी) टावर शामिल हैं।
राजस्थान पुलिस अकादमी में 12 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित 300 क्षमता वाले महिला छात्रावास तथा नगरीय निकायों में 109 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाए गए 506 शौचालयों का भी लोकार्पण किया गया।
जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया, उनमें जयपुर नगर निगम क्षेत्र में 625 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कचरा प्रबंधन की 76 परियोजनाएं तथा अमृत 2.0 के तहत 465 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले सीवरेज कार्य शामिल हैं।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा सहित अन्य मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
भाषा बाकोलिया खारी
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