नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के शिक्षकों ने मंगलवार को एक पीएचडी शोधार्थी द्वारा प्राध्यापक के साथ की गई कथित मारपीट की कड़ी निंदा करते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। हालांकि, इस मामले में विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय जांच समिति ने अभी तक अपनी कार्रवाई शुरू नहीं की है।
दिल्ली शिक्षक संघ (डीटीएफ) ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि शोधार्थी को निलंबित करना ही काफी नहीं है, उसके खिलाफ 'सख्त तथा त्वरित' कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन ने एक बयान में कहा, '...यह हमला कोई अकेली घटना नहीं है। परिसर में शिक्षकों की सुरक्षा और गरिमा के साथ बार-बार समझौता किया जा रहा है।'
इस बीच, घटना की जांच के लिए रसायन विज्ञान विभाग के राजीव गुप्ता, इतिहास विभाग के विपुल सिंह और हिंदी विभाग की सुधा सिंह की तीन सदस्यीय स्वतंत्र समिति गठित की गई है।
समिति के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, 'हमें अधिसूचना मिल गई है, लेकिन प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है। मामले की समय पर जांच कर रिपोर्ट जारी की जाएगी।'
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में सोमवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
उमंग भवन में सोमवार सुबह करीब 10.30 बजे हुई यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई थी। डीयू के प्रॉक्टर मनोज कुमार सिंह के अनुसार, फुटेज में शोधार्थी प्राध्यापक को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहा है। इसके बाद प्रॉक्टर कार्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 (फेज-2) के विधि संकाय के इस शोधार्थी को निलंबित कर दिया और दिल्ली विश्वविद्यालय अधिनियम, 1922 के अध्यादेश 15-बी के तहत परिसर में उसके प्रवेश पर रोक लगा दी।
विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया, 'पीड़ित प्राध्यापक लॉ सेंटर-2 के प्रभारी हैं। जानकारी के अनुसार, शोधार्थी लंबे समय से इंतजार कर रहा था लेकिन उसे गाइड नहीं मिला था, जिसके बाद यह घटना हुई।'
घटना के विरोध में विधि संकाय के शिक्षकों ने मंगलवार को बैठक बुलाई और परिसर में हिंसा व धमकी के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। संकाय सदस्यों ने संदेश साझा करते हुए कहा, 'यह किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय पर हमला है।'
डीटीएफ अध्यक्ष राजीव राय और सचिव आभा देव हबीब ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं पर प्रशासन का रुख धीमा और अपर्याप्त रहा है। उन्होंने विधि संकाय में प्राध्यापकों के साथ अभद्रता और 2025 में डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज में डूसू की तत्कालीन संयुक्त सचिव दीपिका झा द्वारा प्राध्यापक को थप्पड़ मारने की घटना का जिक्र करते हुए इसे एक व्यापक चलन बताया।
अकादमिक परिषद सदस्य अनुमेहा मिश्रा और कार्यकारी परिषद सदस्य मिथुनराज धूसिया ने भी घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शिक्षकों के खिलाफ हिंसा के मामले बढ़े हैं और प्रशासन निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहा है।
भाषा सुमित वैभव
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