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कराधान और भुगतान प्रणाली कानूनों में संशोधन विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम, 2026 और भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन से जुड़े कानून को मंजूरी दे दी है।

विधि मंत्रालय की 17 अगस्त को जारी राजपत्र अधिसूचना के मुताबिक, इन दोनों विधेयकों को राष्ट्रपति ने अपनी मंजूरी दे दी है। इन विधेयकों को संसद ने 10 अगस्त को पारित किया था।

भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन से सरकार को एकीकृत भुगतान प्रणाली यूपीआई और रुपे कार्ड लेनदेन पर शून्य 'व्यवसायी रियायती दर' (एमडीआर) व्यवस्था में बदलाव के लिए कानूनी आधार मिल गया है।

सरकार अधिसूचना के जरिये यह तय कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेनदेन पर एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा।

फिलहाल, बैंक और भुगतान प्रणाली प्रदाता यूपीआई एवं रुपे डेबिट कार्ड से किए गए भुगतान पर उपयोगकर्ताओं से शुल्क नहीं ले सकते हैं।

एनपीसीआई की अध्यक्षता वाली यूपीआई एवं सेवा संचालन समिति अब एमडीआर शुल्क के संबंध में निर्णय लेगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में कहा था कि उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई भुगतान निःशुल्क बना रहेगा और भविष्य में एमडीआर शुल्क कुछ निश्चित श्रेणियों के कारोबारी लेनदेन पर ही लागू होगा।

वहीं, कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) अधिनियम का उद्देश्य विदेशी पूंजी आकर्षित करना, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देना और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए भारतीय डेटा केंद्रों का इस्तेमाल सुगम बनाना है।

यह कानून पांच जून, 2026 को जारी उस अध्यादेश का स्थान लेता है, जिसके तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की ब्याज आय और पूंजीगत लाभ को आयकर से छूट दी गई थी।

इस अधिनियम में विदेशी कंपनियों के लिए भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद का अनुबंध विनिर्माण पर कराने को लेकर उपलब्ध आयकर छूट को वित्त वर्ष 2040-41 तक बढ़ा दिया गया है। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, पर्सनल कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनके प्रमुख कलपुर्जे एवं सहायक उपकरण शामिल हैं।

इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकाइयों को कलपुर्जों की आपूर्ति के लिए सीमा शुल्क गोदामों में सामान रखने वाली विदेशी कंपनियों को 15 साल तक, यानी 2040-41 तक, आयकर छूट देने का प्रावधान किया गया है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय