पटना, 17 अगस्त (भाषा) मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को बिहार के नालंदा जिले में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) से मुलाकात के बाद उन्हें ‘‘लोकतंत्र की आधारशिला’’ बताया।
पटना में निर्वाचन साक्षरता क्लब और ईसीआईनेट ऐप पर आयोजित सम्मेलन से इतर संवाददाताओं से बातचीत में कुमार ने कहा, ‘‘बीएलओ लोकतंत्र की आधारशिला हैं। वे हर मतदाता के घर जाते हैं और पारदर्शी तरीके से यह सुनिश्चित करते हैं कि पात्र मतदाताओं के मतदाता पहचान पत्र बनें।’’
सीईसी ने कहा कि दिन में नालंदा जिले के बीएलओ से मुलाकात के बाद उन्हें लगा कि वहां के अधिकारियों में मौजूद क्षमताएं ‘‘देशभर के सभी बीएलओ में होनी चाहिए।’’
कुमार ने बिहार से शुरुआत करते हुए पूरे देश में ‘ईएलसी 2.0’ के तहत निर्वाचन साक्षरता क्लब (ईएलसी) स्थापित किए जाने की भी घोषणा की।
उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता के बारे में क्लब स्थापित करने की प्रक्रिया बिहार से शुरू की गई है और इसे बड़े पैमाने पर पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा।’’
सीईसी ने कहा कि सम्मेलन में बिहार के विभिन्न जिलों से विश्वविद्यालयों के कुलपति, कॉलेजों और स्कूलों के प्रधानाचार्य तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और निर्वाचन प्रक्रिया को मजबूत करने को लेकर ‘‘बहुत अच्छे सुझाव’’ दिए।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिभागियों के साथ बातचीत के बाद मुझे पूरा विश्वास है कि जिस तरह बिहार ने पूरे देश को पारदर्शी और शांतिपूर्ण मतदान का उपहार दिया, उसी तरह वह पूरे देश के लिए निर्वाचन साक्षरता क्लब के रूप में एक वरदान देगा।’’
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कुमार ने कहा कि 2025 में कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम के दौरान सभी बीएलओ ने समर्पण और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया, जिससे मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली।
कुमार ने बीएलओ से उनके कार्य अनुभव, समस्याओं और सुझावों के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सहभागी बनाने के लिए उनके विचार महत्वपूर्ण हैं।
सम्मेलन में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल, पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार, उनके पूर्ववर्ती और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसईबी) के अध्यक्ष एस.एम. थियागराजन समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।
भाषा कैलाश खारी
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