Breaking News

लखनऊ में आज UP टेक्निकल एजुकेशन परीक्षा, 52 केंद्रों पर दो शिफ्ट में होगा एग्जाम     |   नेपाल बाढ़ में जान गंवाने वालों का आंकड़ा 1369 पहुंचा     |   CM योगी आज चित्रकूट दौरे पर जाएंगे, 800 बाढ़ प्रभावित परिवारों को देंगे राहत सामग्री     |   झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार का निधन, हार्ट अटैक से गई जान     |   ग्रीस में एयर शो के दौरान F-4 फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त, 2 लोगों की मौत     |  

मंत्री नागेंद्र को हटाने की मांग को लेकर कर्नाटक विधानसभा की कार्यवाही बाधित

बेंगलुरु, 17 अगस्त (भाषा) कर्नाटक विधानसभा की कार्यवाही सोमवार को विपक्ष के हंगामे के कारण बाधित रही। विपक्ष ने सरकारी निगम में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के गबन के मामले में आरोपों का सामना कर रहे मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

जैसे ही विधानसभा अध्यक्ष जी. एस. पाटिल ने प्रश्नकाल शुरू करने की घोषणा की, विपक्षी भाजपा और जनता दल (एस) सदस्यों ने यह मुद्दा उठाया।

नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक सुनील कुमार ने इस मामले को उठाते हुए सवाल किया कि “एक भ्रष्ट मंत्री” के सदन में मौजूद रहने पर वे प्रश्नकाल में कैसे हिस्सा ले सकते हैं।

नागेंद्र को हटाने की मांग करते हुए अशोक ने कहा, “जब तक उन्हें हटाया नहीं जाता, हम सदन की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। मुख्यमंत्री को उन्हें तत्काल मंत्रिमंडल से हटा देना चाहिए।”

भाजपा ने पहले ही घोषणा कर दी है कि यदि उन्हें बर्खास्त नहीं किया गया तो वह मानसून सत्र की कार्यवाही नहीं चलने देगी।

नागेंद्र वर्तमान में योजना एवं सांख्यिकी मंत्री हैं।

नागेंद्र ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में करदाताओं के पैसे के कथित गबन के आरोपों के बाद पिछली सिद्धरमैया सरकार के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें तीन अगस्त को डी. के. शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।

अशोक ने सवाल किया, “जब सिद्धरमैया मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने नागेंद्र का इस्तीफा ले लिया था। फिर अब उन्हें मंत्रिमंडल में क्यों शामिल किया गया है?”

मंत्रियों, सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों और विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह मुद्दा बिना किसी पूर्व सूचना के उठाया जा रहा है। बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा और अन्य लोगों ने विपक्ष पर नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना सूचना दिए बेबुनियाद आरोप लगाकर सदन का समय बर्बाद करने का आरोप लगाया।

ईडी ने वाल्मीकि निगम घोटाला मामले में जुलाई 2024 में नागेंद्र को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसी साल अक्टूबर में बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने बल्लारी के विधायक को जमानत दे दी थी।

इस मामले में ईडी और सीबीआई की ओर से दाखिल आरोपपत्र में नागेंद्र का नाम शामिल किया गया है।

भाजपा के विरोध प्रदर्शन और लगातार नारेबाजी के बीच अध्यक्ष के बार-बार प्रश्नकाल चलाने की अपील के बावजूद हंगामा जारी रहा जिसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।

जब सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई, तो भाजपा और जद(एस) के सदस्यों ने अपनी-अपनी सीटों से विरोध जारी रखा और नागेंद्र को हटाने की मांग की।

विधानसभा अध्यक्ष पाटिल ने कहा कि उन्होंने सत्ताधारी पार्टी से बात की है और अगर विपक्ष नोटिस देता है, तो वे इस मामले पर चर्चा और सरकार की ओर से जवाब की अनुमति देंगे।

विपक्ष हालांकि पहले नागेंद्र के इस्तीफे या उन्हें हटाए जाने और उसके बाद चर्चा की बात पर अड़ा रहा।

विपक्ष के नरम पड़ने के कोई संकेत न मिलने पर, विधानसभा अध्यक्ष ने नारेबाजी के बीच प्रश्नकाल की कार्यवाही आगे बढ़ाई। कांग्रेस विधायकों ने सवाल पूछे और मंत्रियों ने शोर-शराबे के बीच जवाब दिए।

भाषा प्रशांत माधव

माधव