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संसद में प्रश्न की अनुमति नहीं मिलती या जवाब नहीं दिया जाता: कांग्रेस सांसद

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद मनीष तिवारी और विवेक तन्खा ने सोमवार को आरोप लगाया कि संसद में सदस्यों द्वारा उठाए जाने वाले सवालों को नियमित रूप से स्वीकृति नहीं दी जा रही है या उनका जवाब नहीं दिया जा रहा है।

तिवारी ने कहा कि सितंबर, 2020 से अगस्त 2025 के बीच उनके द्वारा पूछे गए 120 से अधिक सवालों को मंजूरी नहीं दी गई। इन सवालों में चीन सीमा पर घुसपैठ, ऑपरेशन सिंदूर, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद, रूस से कच्चे तेल का आयात, किसान आंदोलन और निर्वाचन क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

चंडीगढ़ से लोकसभा सदस्य तिवारी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि इस सूची को अभी अद्यतन नहीं किया गया है और वह अपने सहयोगियों से इसे अद्यतन करवाएंगे।

उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और लोकसभा सचिवालय को बार-बार पत्र लिखे जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

तिवारी ने आरोप लगाया, “सरकार ऐसे सवालों का जवाब देने से बचती है जो उसके लिए असहज होते हैं। इसलिए इन सवालों को मामूली नियमों का हवाला देकर शुरुआत में ही खारिज कर दिया जाता है और इसका कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण भी नहीं दिया जाता।”

राज्यसभा सदस्य तन्खा ने दावा किया कि उन्होंने मौजूदा सत्र में उच्च सदन में करीब 90 सवाल पूछे, लेकिन उनमें से 10 से भी कम के जवाब मिले।

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “संसदीय सवालों का जवाब नहीं देना एक चलन बन गया है। लोकतंत्र में सरकार संसद के प्रति जवाबदेह नहीं है, यह हमारी संस्थाओं की अप्रासंगिकता और क्षरण का प्रतीक है।”

तिवारी ने कहा कि 1980 के दशक के मध्य से व्यवधान और नारेबाजी आम हो गई है तथा विभिन्न राजनीतिक दल चर्चा में जीतने के बजाय संसद के पूरे सत्र को बाधित करने पर गर्व करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सांसदों का आकलन उनके तर्कपूर्ण विचारों के बजाय सदन के भीतर और बाहर नारेबाजी करने की क्षमता से होने लगे, तो ऐसी संस्थाओं का पतन तय है।

भाषा हक माधव वैभव

वैभव