छत्रपति संभाजीनगर, 16 अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय में लिपिक पद पर भर्ती के लिए आयोजित ऑनलाइन 'टाइपिंग टेस्ट' में शामिल हुए कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा के दौरान तकनीकी और सर्वर संबंधी समस्याओं का आरोप लगाते हुए रविवार को छत्रपति संभाजीनगर में विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
इस प्रदर्शन में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संयोजक अभिजीत दीपके भी शामिल हुए।
दीपके ने आरोप लगाया कि कई अभ्यर्थियों को बिना उनकी किसी गलती के अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने परीक्षा दोबारा आयोजित कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
अधिकारियों की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
अभ्यर्थियों ने शिकायत की कि परीक्षा के दौरान कंप्यूटर सही तरह से काम नहीं कर रहा था। कुछ का कहना था कि उनकी कंप्यूटर की स्क्रीन पीली दिखने लगी और कीबोर्ड ने भी काम करना बंद कर दिया था। परीक्षा से वंचित होने के डर से अभ्यर्थियों ने इसे दोबारा आयोजित करने की मांग की है। यह कथित व्यवधान सुबह 10 बजे से 11:15 बजे के सत्र के बीच हुआ।
उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार द्वारा जारी एक संदेश में कहा गया है कि लिपिक पद के लिए टाइपिंग परीक्षा एजेंसी के माध्यम से सुचारू रूप से आयोजित की गई थी, हालांकि कुछ परीक्षा केंद्रों पर, विशेष रूप से औरंगाबाद और कल्याण केंद्र में कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं।
इसमें कहा गया है कि एजेंसी द्वारा कराई गई प्रक्रिया में अगर कोई तकनीकी समस्या सामने आई है, तो उसकी जांच की जा रही है। मामले में की जाने वाली कार्रवाई के बारे में अभ्यर्थियों को आधिकारिक तौर पर विधिवत सूचित किया जाएगा।
छत्रपति संभाजीनगर के विभिन्न केंद्रों पर मराठवाड़ा और विदर्भ के लगभग 2,900 अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे। वहीं, उच्च न्यायालय की नागपुर और औरंगाबाद पीठ के तहत 1,300 पदों के लिए तीन सत्रों में आयोजित इस परीक्षा के लिए पूरे महाराष्ट्र से लगभग 13,000 उम्मीदवार पात्र थे।
दीपके ने इस कथित गड़बड़ी की जानकारी मिलने के बाद छत्रपति संभाजीनगर के सुराणा नगर इलाके में स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचे और प्रभावित उम्मीदवारों से मुलाकात की।
दीपके ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने शिकायतों को खारिज कर उम्मीदवारों से कहा कि वे परीक्षा देना नहीं जानते।
उन्होंने कहा, 'जब तक इन उम्मीदवारों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, मैं उनके साथ यहीं रहूंगा। अगर उन्होंने धरना प्रदर्शन पर बैठने का फैसला किया है, तो मैं उनका समर्थन करूंगा।'
भाषा प्रचेता संतोष
संतोष