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किस कानून के तहत आरएसएस का गठन हुआ है : प्रियंक खरगे

बेंगलुरु, 16 अगस्त (भाषा) कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने रविवार को सवाल किया कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस)किस कानून के तहत अस्तित्व में है और किस कानूनी पहचान के साथ काम करता है?

उन्होंने कहा कि मुद्दा अस्तित्व का नहीं, बल्कि जवाबदेही का है।

प्रियंक ने सवाल किया कि जो संगठन भारत का भविष्य संवारने का दावा करता है, वह अपनी कानूनी पहचान और सार्वजनिक जवाबदेही को स्पष्ट रूप से तय करने में क्यों इतना हिसकिचा रहा है?

राज्य के गृहमंत्री यह प्रतिक्रिया भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. संतोष द्वारा शनिवार को दिये गए उस बयान पर दी है जिसमें कहा गया था कि आरएसएस को अपना अस्तित्व साबित करने के लिए पंजीकरण की जरूरत नहीं है, क्योंकि संगठन ने लाखों लोगों के भरोसे के साथ काम कर रहा है।

संतोष ने यहां ‘हिंदू जागरण वेदिके’ द्वारा आयोजित ‘अखंड भारत संकल्प दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दावा किया था कि बंटवारे के दौरान ‘‘आरएसएस हिंदुओं के साथ खड़ा रहा’’ और बिना औपचारिक पंजीकरण के काम करता रहा।

प्रियंक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ प्रिय संतोष जी, कोई भी इस बात पर सवाल नहीं उठा रहा है कि आरएसएस का अस्तित्व है या नहीं। सवाल यह है कि यह किस कानून के तहत अस्तित्व में है और किस कानूनी पहचान के साथ काम करता है?’’

उन्होंने कहा, ‘‘कोई संगठन अपने 100 साल के इतिहास का हवाला देकर, लाखों सदस्यों का दावा करके, दक्षिणा इकट्ठा करके, बेनामी संपत्ति का इस्तेमाल करके, मुखौटा संस्थाएं चलाकर, देशव्यापी गतिविधियां आयोजित करके और राजनीतिक व सार्वजनिक मामलों को प्रभावित करके, फिर पंजीकरण, वित्त और जवाबदेही से जुड़े सवालों का जवाब यह कहकर नहीं दे सकता कि - हमारा अस्तित्व तो खुद-ब-खुद साबित है।’’

मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुद्दा अस्तित्व का नहीं, बल्कि जवाबदेही का है। उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस को ‘‘अपना अस्तित्व स्थापित करने’’ के लिए किसी पंजीकरण की जरूरत नहीं है, तो देश को यह बताएं, ‘‘इसका कानूनी दर्जा असल में क्या है? कानूनी तौर पर आरएसएस का गठन कौन करता है? इसकी संपत्ति का मालिक कौन है?’’

प्रियंक ने सवाल किया कि आरएसएस के बैंक खाते किसके नाम पर चलाए जाते हैं? उन्होंने कहा, ‘‘दान किस ढांचे के तहत लिया जाता है और उसका हिसाब-किताब कैसे रखा जाता है? इसके ऑडिट किए गए खाते और कानूनी तौर पर जरूरी खुलासे कहां हैं?’’

प्रियंक ने कहा कि देश भर में फैली एक सदी पुरानी संस्था को इन बुनियादी सवालों का जवाब देने में सक्षम होना चाहिए।

भाषा धीरज नरेश

नरेश