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भाजपा ने चिदंबरम की ‘दिमागी नक्सली’ टिप्पणी को बताया ‘बेहद गैर-जिम्मेदाराना’

नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) भाजपा ने रविवार को पी. चिदंबरम की “गर्व है कि मैं ‘दिमागी नक्सली’ हूं” टिप्पणी को ‘‘बेहद गैर-जिम्मेदाराना’’ करार दिया और कहा कि इससे पता चलता है कि कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार किस तरह काम करती थी।

पटना में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘‘दिमागी नक्सली’’ से आशय ऐसे लोगों से है, जो दिल्ली, मुंबई, पटना और कोलकाता में वातानुकूलित कमरों में बैठकर ‘‘माओवादी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं।’’

प्रसाद ने कहा, ‘‘वे अपने संपर्कों का इस्तेमाल (नक्सल) आंदोलन के लिए धन और अन्य जरूरी सहायता जुटाने में करते हैं। जब वे किसी मुश्किल में फंसते हैं तो टेलीविजन पर आकर इस समूह के जघन्य अपराधों को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। जब माओवादी हिंसा को लेकर जनता में गुस्सा होता है, तो यही लोग उनके बचाव में प्रमुख अंग्रेजी अखबारों में तीखे लेख लिखते हैं।’’

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को ‘‘दिमागी नक्सली’’ कहा जाता है।

प्रसाद ने कहा, ‘‘चिदंबरम ने कहा कि वह ‘दिमागी नक्सली’ हैं। मैं उनकी इस बेहद गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी की निंदा करता हूं।’’

स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने देश को “दिमागी नक्सलियों” से सावधान किया। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया था कि ऐसे लोगों ने व्यवस्था में अपनी पैठ बना ली है और वे नीतियों को प्रभावित करके समाज के लिए खतरा बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश ‘हथियारी नक्सलवाद’ को जंगलों से खत्म करने में सफल रहा है, लेकिन उसके वैचारिक समर्थक हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने के अवसर तलाश रहे हैं।

प्रधानमंत्री पर पलटवार करते हुए चिदंबरम ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है।’’

प्रसाद ने आरोप लगाया कि चिदंबरम की टिप्पणी इस बात का प्रमाण है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार किस तरह काम करती थी।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया, ‘‘मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान माओवादियों ने छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के 76 जवानों की हत्या कर दी थी। इसके बावजूद (तत्कालीन गृह मंत्री) चिदंबरम ने कहा था कि वह बातचीत के लिए तैयार हैं। यहां तक कि जेल में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां हमले को अंजाम देने वाले लोगों के स्वागत की योजना बनाई गई थी।’’

प्रसाद छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में छह अप्रैल 2010 को हुए सबसे घातक माओवादी हमलों में से एक का जिक्र कर रहे थे। घात लगाकर किए गए इस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 75 जवान और राज्य पुलिस के एक अधिकारी की मौत हो गई थी।

प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े एक वर्ग का लंबे समय से माओवादियों के प्रति ‘‘नरम रुख’’ रहा है और दावा किया कि चिदंबरम की टिप्पणी भी इसी सोच को दर्शाती है। उन्होंने कहा, ‘‘दिमागी नक्सली और शहरी नक्सली एक ही सोच के अलग-अलग रूप हैं।’’

प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस के एक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन के दौरान कांग्रेस नेतृत्व, खासकर सोनिया गांधी ने राष्ट्रगीत का अपमान किया।

भाजपा सांसद ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का दावा करने वाली कांग्रेस ने ‘वंदे मातरम्’ के प्रति इस तरह का अनादर दिखाया। कांग्रेस को इसके लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि देश और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए।

भाषा आशीष प्रशांत

प्रशांत