बेंगलुरु, 16 अगस्त (भाषा) कर्नाटक सरकार ने परिचालन और रखरखाव की लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए वाहन के प्रदूषण नियंत्रण (पीयूसी) जांच शुल्क में बढ़ोतरी की है।
सरकारी आदेश के अनुसार, दोपहिया और तिपहिया दोनों वाहनों का शुल्क बढ़ाकर अब 80 रुपये कर दिया गया है; पहले यह क्रमशः 65 और 75 रुपये था।
पेट्रोल, एलपीजी या सीएनजी चालित चार पहिया वाहनों का शुल्क 115 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया है, जबकि डीजल चालित वाहनों के लिए शुल्क 160 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है।
शुल्क बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि अनिवार्य वाहन नियमों की आड़ में कड़ी मेहनत करने वाले कन्नड़ लोगों से पैसे ऐंठने का एक और मौका नहीं बनाया जाना चाहिए।
पीयूसी शुल्क में “जनविरोधी” बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक के लोग इस “लगातार बढ़ते बोझ” से तंग आ चुके हैं।
यह संशोधन 'कर्नाटक पलूशन टेस्टिंग सेंटर ओनर्स एसोसिएशन, बेंगलुरु' के प्रतिवेदन के आधार पर परिवहन एवं सड़क सुरक्षा आयुक्त द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के बाद किया गया है।
एसोसिएशन ने अन्य परिचालन खर्चों के साथ-साथ कच्चे माल, पेट्रोल-डीजल, दैनिक उपयोग की वस्तुओं, जांच केंद्रों का किराया, इंटरनेट सुविधा, उपकरण रखरखाव, प्रिंटर कार्ट्रिज, बिजली और कर्मचारियों के वेतन की बढ़ी हुई लागत का हवाला देते हुए मौजूदा शुल्क में संशोधन की मांग की थी।
कर्नाटक मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 231-बी(13) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरकार ने 13 अगस्त को जारी एक आदेश में जांच शुल्क में संशोधन का आदेश दिया।
हालांकि, केवल कम्प्यूटरीकृत प्रणाली से लैस प्रदूषण जांच केंद्र ही संशोधित शुल्क वसूलने के पात्र होंगे। नया शुल्क केवल उत्सर्जन परीक्षण पर लागू होगा।
भाषा सुमित प्रशांत
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