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यूनिटेक के घर खरीदार सीएमडी के खाली पद, धन की कमी को लेकर चिंतित

नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) संकट में फंसी रियल एस्टेट कंपनी यूनिटेक लिमिटेड के हजारों घर खरीदारों ने अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए धन की कमी पर चिंता जताई है। खरीदारों ने मांग की है कि कंपनी की खाली पड़ी संपत्तियों की नीलामी कर निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा कराया जाए।

यूनिटेक के पांच घर खरीदार संघों ने सरकार और उच्चतम न्यायालय से कंपनी के नए चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) की नियुक्ति जल्द करने की भी अपील की है। कंपनी में यह पद करीब एक महीने से खाली है।

यूनिटेक के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक युधवीर सिंह मलिक का कार्यकाल 20 जुलाई, 2026 को समाप्त हो गया था। खरीदार संगठनों के मुताबिक, नए सीएमडी की नियुक्ति के लिए कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से नाम भी प्रस्तावित किया जा चुका है, लेकिन उच्चतम न्यायालय की मंजूरी अभी बाकी है।

यूनिटेक पर दिल्ली-एनसीआर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं को पूरा करने का दबाव है। कंपनी की परियोजनाओं में करीब 15,000 खरीदार फंसे हुए हैं और कई परियोजनाओं में 15 साल से अधिक की देरी हो चुकी है।

गुरुग्राम स्थित एस्पेस प्रीमियर ओनर्स एसोसिएशन ने कहा कि उसके सदस्य 16 साल से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं। संघ की अध्यक्ष विभा बत्रा ने कहा कि 2010-11 में बुक किए गए घरों की आपूर्ति 2013-14 में होनी थी, लेकिन वे अब भी अधूरे हैं।

खरीदारों के मुताबिक, परियोजनाओं को पूरा करने में सबसे बड़ी बाधा चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक की नियुक्ति में देरी और निर्माण के लिए पर्याप्त धन की कमी है। उनका अनुमान है कि सभी अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए करीब 11,000-12,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी, जबकि ग्राहकों से लगभग 3,000 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सकते हैं।

यूनिवर्ल्ड चेन्नई ओनर्स एसोसिएशन ने भी उच्चतम न्यायालय से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं, एल्डर ग्रोव विला ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने ऋणदाताओं के दावों का दोबारा आकलन करने और उन पर ब्याज भुगतान नहीं करने की मांग की है।

यूनिटेक के एंथिया फ्लोर्स के खरीदार संघ ने भारतीय रिजर्व बैंक से 2005 के बाद यूनिटेक को दिए गए कर्ज का विशेष ऑडिट कराने की मांग की है। संघ ने ऋण मंजूरी और निगरानी में हुई संभावित खामियों की पहचान कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी की है।

कोलकाता स्थित यूनिवर्ल्ड सोशल एंड कल्चरल वेलफेयर सोसायटी ने कहा कि इस पूरे मामले में खरीदारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। संगठन के अध्यक्ष मनीष गांधी ने उम्मीद जताई कि उच्चतम न्यायालय शेष बाधाओं को दूर करने, सीएमडी की नियुक्ति को मंजूरी देने और कानून के मुताबिक यूनिटेक की संपत्तियों के मौद्रीकरण का रास्ता साफ करने के लिए निर्णायक कदम उठाएगा।

वित्त वर्ष 2025-26 में यूनिटेक को 2,455.73 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध घाटा हुआ। इस दौरान कंपनी की कुल आय 566.80 करोड़ रुपये रही थी।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद 2020 में यूनिटेक के निदेशक मंडल को भंग कर दिया था। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने नए निदेशक मंडल के गठन का प्रस्ताव किया था, जिसे शीर्ष न्यायालय ने 20 जनवरी, 2020 को मंजूरी दी थी।

भाषा अजय

अजय

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