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एनजीटी ने अलीगढ़ में चिकित्सा अपशिष्ट अवैध रूप से जलाने के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित की

नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सिविल लाइंस इलाके में खतरनाक चिकित्सा अपशिष्ट और प्लास्टिक अवैध रूप से जलाए जाने के आरोपों की जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित की और कहा कि यह मामला पर्यावरण से जुड़े ‘‘महत्वपूर्ण सवाल’’ उठाता है।

एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव, जिलाधिकारी, अलीगढ़ नगर निगम और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) से जवाब मांगा है।

उसने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अलीगढ़ के जिलाधिकारी के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति गठित की।

एनजीटी ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एक सेवानिवृत्त शिक्षक एवं वरिष्ठ नागरिक की ओर से दायर पत्र याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।

याचिका में दावा किया गया है कि सिविल लाइंस स्थित मुजम्मिल कॉम्प्लेक्स के चिकित्सा केंद्रों और दुकानों से बड़ी मात्रा में चिकित्सा अपशिष्ट निकलता है जिसे रात या सुबह जल्दी जला दिया जाता है। इससे निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण स्थानीय लोगों को सांस संबंधी गंभीर समस्याएं हो रही हैं।

याचिका में कहा गया, ‘‘इन जहरीली गैसों के कारण हमारा जीवन दूभर हो गया है।’’

न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने 12 अगस्त के अपने आदेश में कहा, ‘‘आवेदन में कही गई बातें प्रथम दृष्टया पर्यावरण संबंधी महत्वपूर्ण सवाल उठाती हैं।’’

अधिकरण ने कहा, ‘‘मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए हमारा मानना है कि वास्तविक स्थिति की जांच करने तथा उचित सुधारात्मक उपाय सुझाने के निर्देश के साथ एक संयुक्त समिति गठित किया जाना उचित होगा।’’

एनजीटी ने समिति को स्थल का दौरा करने, आवेदक की शिकायतों पर गौर करने, आवेदक को जांच में शामिल करने, वास्तविक स्थिति की पुष्टि करने, उचित सुधारात्मक कार्रवाई सुझाने और अधिकरण को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।

मामले में आगे की सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

भाषा

सिम्मी रंजन

रंजन