नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की खरीदारी का सिलसिला अगस्त में लगातार दूसरी महीने जारी है। अगस्त के पहले पखवाड़े में एफपीआई ने भारतीय शेयरों में 16,621 करोड़ रुपये का निवेश किया है। बेहतर मूल्यांकन, कंपनियों के मजबूत वित्तीय नतीजों और अमेरिका में ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद ने निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
इससे पहले जुलाई में भी एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 20,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इस तरह लगातार दो महीनों की खरीदारी ने चार माह तक चले भारी बिकवाली के रुख को पलट दिया है।
इस साल विदेशी निवेशकों ने मार्च में 1.17 लाख करोड़ रुपये, अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये, मई में 32,963 करोड़ रुपये और जून में 49,340 करोड़ रुपये की निकासी की थी। इससे पहले फरवरी में उन्होंने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
हालांकि, हालिया खरीदारी के बावजूद एफपीआई 2026 में अब भी भारतीय शेयरों के शुद्ध बिकवाल बने हुए हैं। इस साल अब तक उनकी निकासी करीब 2.4 लाख करोड़ रुपये रही है, जो पूरे 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से भी अधिक है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के अपेक्षाकृत आकर्षक मूल्यांकन, कंपनियों के मजबूत नतीजों, अमेरिका में संभावित ब्याज दर कटौती, कच्चे तेल की नरम कीमतों और रुपये में कम उतार-चढ़ाव ने विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
वल्लम कैपिटल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और पोर्टफोलियो प्रबंधक मनीष भंडारी ने कहा कि भारत के बेहतर मूल्यांकन, मजबूत कॉरपोरेट आय, अमेरिका में नरम ब्याज दरों की उम्मीद और मुद्रा बाजार में स्थिरता विदेशी निवेश को आकर्षित करने वाले प्रमुख कारण हैं।’’
उन्होंने कहा कि निवेशक दक्षिण कोरिया और ताइवान के अत्यधिक लोकप्रिय एआई शेयरों से कुछ पूंजी भारत की ओर भी मोड़ रहे हैं।
‘ट्रैक’ के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी वेदांत गुप्ते के मुताबिक, अगस्त में एफपीआई की खरीदारी से संकेत मिलता है कि पहले की बिकवाली मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से प्रेरित थी, न कि भारत को लेकर किसी बड़ी चिंता के कारण।
उन्होंने कहा कि अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की नरम कीमतें और रुपये में स्थिरता ने विदेशी निवेशकों के लिए भारत से दूरी बनाए रखने के तीन प्रमुख कारणों को काफी हद तक कम कर दिया है।
हालांकि, आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों का रुख वैश्विक संकेतकों पर निर्भर रहेगा। अमेरिकी बॉन्ड पर प्रतिफल, डॉलर सूचकांक, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के आमदनी के अनुमान में बदलाव एफपीआई प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।
विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय ऋण या बॉन्ड बाजार में भी बनी हुई है। समीक्षाधीन अवधि में एफपीआई ने पूर्ण पहुंच मार्ग (एफएआर) के जरिये 972 करोड़ रुपये और सामान्य मार्ग से 69 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
भाषा अजय
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