नयी दिल्ली, 16 अगस्त (भाषा) देश में आयातकों द्वारा लागत से नीचे दाम पर बिकवाली के कारण बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन, कच्चे पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तेल जैसे आयातित खाद्य तेलों में गिरावट कायम रही। इस गिरावट के कारण बाजार की कारोबारी धारणा प्रभावित होने से सरसों तेल के दाम में भी मामूली नुकसान रहा।
आयातित तेल सस्ता होने के कारण मांग कमजोर रहने के बीच मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर रहे। कम दाम पर किसानों की बिकवाली थमने और ऊंचे भाव पर तेल के नहीं खपने के बीच सरसों तिलहन के दाम भी स्थिर बने रहे। ब्रांडेड कंपनियों की तेल मिलों की मांग बढ़ने और कम उपलब्धता के बीच केवल बिनौला तेल के दाम समीक्षाधीन सप्ताहांत में तेजी दर्शाते बंद हुए।
बीते सप्ताहांत आयातित खाद्य तेलों के आयात शुल्क मूल्य में भी मामूली घट-बढ़ की गई है। 15 अगस्त के मौके पर शनिवार को तेल-तिलहन बाजार बंद रहे।
बाजार सूत्रों ने कहा कि आयातक निरंतर लागत से नीचे दाम पर बिकवाली कर रहे हैं। इसके साथ देखा जाये तो यही आयातक निरंतर आयकर का भी भुगतान कर रहे हैं। बैंकों में अपना कर्ज (ऋण साख-पत्र या एलसी) घुमाते रहने के लिए उन्हें अपना तुलन-पत्र (बैलेंस शीट) में मुनाफा दर्शाना होता है। अगर आयातकों का कारोबार बगैर लाभ या मुनाफे की स्थिति में भी रहे तो बैंक, आयातकों का ‘एलसी’ बंद कर देंगे। फिर लागत से नीचे बिकवाली से कौन प्रभावित हो रहा है?
सूत्रों ने कहा कि इन आयातकों का अधिकतम कर्ज सरकारी बैंकों का होता है। अगर इस घाटे की भरपाई का बोझ सरकारी बैंकों पर आता है तो यह अंतत: किसानों, बैंकों का ही नुकसान होगा। इस ओर अधिक ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।
लागत से नीचे दाम की बिकवाली के कारण बीते सप्ताह सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ एवं पामोलीन तेल में गिरावट देखी गई।
आयातित तेलों की इस गिरावट के असर से कारोबारी धारणा प्रभावित होने की वजह से सरसों तेल के दाम में भी मामूली गिरावट रही। वैसे भी जब तेल पेराई मिलें सरसों का दाम घटाती हैं तो किसान अपनी बिकवाली को घटा देते हैं। दूसरी ओर ऊंचे दाम की वजह से सरसों तेल का खपना मुश्किल हो जाता है। आयातित तेल देशी खाद्य तेलों के मुकाबले 22-28 रुपये प्रति किलो सस्ते हैं।
आयातित तेलों के सस्ता होने की वजह से मूंगफली की मांग प्रभावित होने के बीच बीते सप्ताह मूंगफली तेल-तिलहन के दाम स्थिर बने रहे।
सूत्रों ने कहा कि वैसे मूंगफली का अच्छा दाम मिलने की वजह से इसका उत्पादन बढ़ा है। इसका किसानों और सरकार के पास स्टॉक है। दाम अच्छा मिलने की वजह से जिन राज्यों में मूंगफली खेती का प्रचलन नहीं था, वहां भी इसकी बुवाई का रकबा बढा है।
कम उपलब्धता होने और ब्रांडेड कंपनियों की मांग बढ़ने के कारण बीते सप्ताह केवल बिनौला तेल कीमतों में सुधार आया।
सूत्रों ने बताया कि बीते सप्ताह सरसों दाना 8,300-8,350 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर बना रहा। जबकि सरसों तेल दादरी 25 रुपये की गिरावट के साथ 16,750 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल भी क्रमश: 5-5 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 2,725-2,825 रुपये और 2,725-2,875 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाना और सोयाबीन लूज का थोक भाव क्रमश: 400-400 रुपये की गिरावट के साथ क्रमश: 6,900-6,950 रुपये और 6,750-6,850 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
इसी प्रकार, दिल्ली में सोयाबीन तेल 50 रुपये की गिरावट के साथ 15,675 रुपये प्रति क्विंटल, सोयाबीन इंदौर तेल 50 रुपये की गिरावट के साथ 15,525 रुपये और सोयाबीन डीगम तेल 100 रुपये की गिरावट के साथ 12,000 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
बीते सप्ताह मूंगफली तिलहन का दाम 7,350-7,925 रुपये क्विंटल, मूंगफली तेल गुजरात 17,000 रुपये क्विंटल और मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,680-2,980 रुपये प्रति टिन पर स्थिर बंद हुआ।
समीक्षाधीन सप्ताह में सीपीओ तेल का दाम भी 100 रुपये की गिरावट के साथ 13,700 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। पामोलीन दिल्ली 75 रुपये की गिरावट के साथ 15,575 रुपये प्रति क्विंटल तथा पामोलीन एक्स कांडला तेल 75 रुपये की गिरावट के साथ 14,325 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
ब्रांडेड कंपनियों की औद्योगिक मांग बढ़ने और उपलब्धता कम रहने के बीच एकमात्र बिनौला तेल का दाम 200 रुपये के सुधार के साथ 17,100 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
भाषा राजेश
अजय
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