नयी दिल्ली, 15 अगस्त (भाषा) राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह ‘‘फिर से सपने बेच रहे हैं’’ और पिछले 12 सालों से उनकी सोच ‘‘पहले भाजपा, फिर देश’’ रही है।
वरिष्ठ वकील और पूर्व केंद्रीय मंत्री सिब्बल ने मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि असली समस्या भाजपा विचारधारा वाले कुछ लोगों की है, जो ‘‘स्वभाव से ही तानाशाही’’ वाले हैं।
सिब्बल ने महिलाओं के लिए आरक्षण की मोदी की टिप्पणी की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संसद और विधानसभाओं में आरक्षण लागू करने में दिलचस्पी नहीं रखती, बल्कि वह अगले आम चुनाव में जीत पक्की करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन करने के मकसद से दो-तिहाई बहुमत चाहती है।
उन्होंने यहां प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘मैं लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री का संबोधन बहुत ध्यान से सुन रहा था। उन्होंने कई मुद्दों पर बात की, लेकिन कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनका जिक्र मैं करना चाहता हूं। पहला मुद्दा प्रधानमंत्री द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने का है। मुझे लगता है कि ऐसा नहीं कहा जाना चाहिए था, खासकर तब जब उन्हें पता हो कि दुनिया उनकी बातें सुन रही है।’’
सिब्बल ने कहा, ‘‘जब वह ‘दिमागी नक्सल’ यानी नक्सली सोच वाले लोगों की बात करते हैं, तो वह भारत के लोगों और बाकी दुनिया को यह संकेत दे रहे होते हैं कि देश में ऐसे लोग हैं जो बौद्धिक रूप से अराजकतावादी हैं और जो देश को अंदर से बर्बाद करना चाहते हैं।’’
भाषा शफीक संतोष
संतोष