नयी दिल्ली, 15 अगस्त (भाषा) भारत में बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) अधिनियम, 2025 के मसौदा नियमों के अनुसार, परमाणु संयंत्र संचालकों को परमाणु क्षति के लिए एक बीमा पॉलिसी, वित्तीय सुरक्षा या दोनों के संयोजन को बनाए रखना आवश्यक है।
परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी मसौदा नियमों में कहा गया है कि यह वित्तीय सुरक्षा संबंधित भंडारण कुंड से सभी प्रयुक्त ईंधन हटाए जाने तक जारी रहनी चाहिए।
मसौदा नियमों के अनुसार, केंद्र सरकार को हर पांच साल में एक बार विशेषज्ञों का एक समूह बनाना होगा, जो परमाणु नुकसान के लिए संचालक की ‘नागरिक दायित्व (सिविल लाएबिलिटी)’ की अधिकतम सीमा की समीक्षा करेगा।
एक और अहम प्रावधान यह है कि अगर कोई परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर विदेशी डिजाइन का है, तो उसके डिजाइन को उसके मूल देश में नियामक निकाय से प्रमाणित या मंजूरी मिलनी चाहिए।
मसौदा नियमों में कहा गया है कि ऐसा परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर, मूल देश या किसी अन्य विदेशी देश में भी चालू हालत में होना चाहिए।
इसके अलावा, मसौदा नियमों में यह बताया गया है कि लाइसेंस देने वाला प्राधिकार, आवेदन स्वीकार करने के बाद ‘सिद्धांत रूप में मंज़ूरी’ दे सकता है, भले ही संयंत्र स्थल या प्रौद्योगिकी का चुनाव न किया गया हो।
मसौदा नियमों के अनुसार, ‘सैद्धांतिक मंजूरी’ मिलने के बाद, आवेदक रिएक्टर प्रौद्योगिकी विक्रेता के साथ बातचीत शुरू कर सकता है और जमीन व अन्य जरूरी अवसंरचना हासिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है।
मसौदा नियमों में यह भी कहा गया है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र या रिएक्टर के निर्माण, स्वामित्व, संचालन और परित्याग करने (डिकमीशनिंग) के लिए एक ही समग्र लाइसेंस जारी किया जाएगा।
मसौदे में कहा गया है कि इनमें से किसी भी गतिविधि के लिए अलग से कोई लाइसेंस न तो मांगा जाएगा, न ही दिया जाएगा, और न ही उसे बांटा या अलग किया जाएगा।
भाषा प्रशांत दिलीप
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