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देश के दूसरे हिस्सों से आकर असम में बसने वाले लोग अपनी मातृभाषा असमिया दर्ज कराएं: हिमंत

गुवाहाटी, 15 अगस्त (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शनिवार को देश के दूसरे हिस्सों से आकर राज्य को अपना घर बनाने वाले लोगों से अपील की कि वे जनगणना के दौरान अपनी मातृभाषा के रूप में ‘असमिया’ दर्ज कराएं।

पिछली जनगणना प्रक्रियाओं में असमिया भाषा बोलने वालों की संख्या में गिरावट को लेकर चिंता जताई गई थी, जिसके मद्देनजर शर्मा ने यह अपील की।

यहां स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रध्वज फहराने के बाद अपने संबोधन में शर्मा ने कहा, “वर्ष 2026 महत्वपूर्ण है, क्योंकि जनगणना प्रक्रिया शुरू हो गई है। एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर देश के भविष्य की योजनाएं बनाई जाएंगी। इसमें भाग लेना और इसे सफल बनाना हमारा कर्तव्य और जिम्मेदारी है।”

उन्होंने कहा कि आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया के दौरान बराक घाटी के लोग और जनजातीय समुदाय अपनी-अपनी भाषाओं को अपनी मातृभाषा के रूप में दर्ज कर सकते हैं।

शर्मा ने कहा, “बराक घाटी में लोग अपनी मातृभाषा का उल्लेख करते समय अपनी अंतरात्मा के अनुसार फैसला करेंगे। बोडो, राभा, तिवा, मिसिंग और अन्य समुदाय के लोग भी अपनी-अपनी भाषाओं का उल्लेख करेंगे। असम सभी स्थानीय भाषाओं के विकास की कामना करता है। हमारी जनजातीय भाषाएं असमिया भाषा की तरह ही अनमोल हैं और उनकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।”

उन्होंने कहा, “लेकिन जनजातीय समुदायों और बराक घाटी के लोगों के अलावा, वे गौरवपूर्ण असमिया लोग, जो किसी समय राजस्थान या किसी अन्य स्थान से अलग भाषा और संस्कृति लेकर यहां आए थे, उनसे मेरा अनुरोध है कि वे अपनी मातृभाषा के रूप में 'असमिया' का उल्लेख करें।”

साल 1971 की जनगणना के दौरान राज्य की 59.53 प्रतिशत आबादी ने अपनी मातृभाषा ‘असमिया’ बताई थी। हालांकि, 2001 में यह घटकर 48.80 प्रतिशत और 2011 में 48.38 प्रतिशत रह गई। माना जा रहा है कि पिछली जनगणना के बाद यह आंकड़ा और कम हुआ है।

भाषा जोहेब दिलीप

दिलीप