पटना, 15 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘आंदोलनजीवी’ और ‘अर्बन नक्सल’ जैसे शब्दों के जरिए देश के राजनीतिक शब्दकोश में योगदान दिया है।
जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव ने प्रधानमंत्री को सलाह दी कि वह पूरे देश का दौरा करके दिमागी नक्सलियों की पहचान करें।
हालांकि, बिहार के एक अन्य नेता और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने प्रधानमंत्री का समर्थन किया।
पासवान ने कहा कि जो लोग अराजकता फैलाने और भारत की प्रगति को रोकने की कोशिश करते हैं, उनकी पहचान किए जाने की जरूरत है।
मोदी ने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में देश को उन बौद्धिक नक्सलियों (दिमागी नक्सलियों) से आगाह किया, जो मोदी के अनुसार कथित रूप से व्यवस्था में गहराई तक जड़ें जमा चुके हैं और नीतियों को प्रभावित करके समाज के लिए खतरा बने हुए हैं।
उन्होंने नागरिकों से ऐसे लोगों की ‘‘पहचान करने और उन्हें अलग-थलग करने’’ का आग्रह किया।
राजद सांसद मनोज झा ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हर साल शब्दावली में एक नया शब्द जोड़ने के लिए धन्यवाद देता हूं। एक बार उन्होंने ‘आंदोलनजीवी’ शब्द गढ़ा था और फिर ‘अर्बन नक्सल’।”
झा ने कहा, “मैंने एक बार संसद में पूछा था कि ‘अर्बन नक्सल’ का क्या मतलब है। मुझे बताया गया कि अर्बन नक्सल की कोई परिभाषा नहीं है। अब यह नया शब्द (दिमागी नक्सल) सामने आया है।”
वहीं, तेज प्रताप यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री यह स्पष्ट करें कि “दिमागी नक्सल कौन है और कौन नहीं।”
यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री को पूरे देश का दौरा करके दिमागी नक्सलियों की पहचान करनी चाहिए। कौन जानता है, उन्हें भाजपा के अंदर ही सबसे ज्यादा संख्या में दिमागी नक्सली मिल जाएं।”
प्रधानमंत्री मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पासवान ने कहा कि उन लोगों की पहचान करने की जरूरत है, जो ‘‘अराजकता फैलाने और भारत की प्रगति की राह में बाधा डालने के इरादे’’ से आगे बढ़ रहे हैं।
भाषा जोहेब नेत्रपाल
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